अच्छे भले चंगे लोगों के बात करते हुए हार्ट अटैक आता है और प्राणों का अंत हो जाता है। कोविड के बाद ये घटनाएं कुछ ज्यादा हो गई हैं। इन में कुछ संख्या में तो वास्तविक वृद्धि हुई है और काफी कुछ सूचनाओं के तीव्र प्रसार से ज्यादा नजर आने लगी हैं क्योंकि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु तेजी से सोशल मीडिया पर फैलती है। कोविड को दूर हटा कर यदि हम अत्याधुनिक मेडिकल शोध साहित्य पर नजर डालें तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। दुनियां में बड़े मकान, विशालकाय समुद्री जहाज एवम् पनडुब्बियां, बड़ी कारें, लंबे पुल आदि बनाने को प्राथमिकता दी रही हैं और इन निर्माणों के विरुद्ध उठती आवाजों को मूर्ख और षड्यंत्रकारियों की आवाज का रूप दिया जा रहा है। लोगों को उकसाया जा रहा है कि खूब बच्चे पैदा करो ताकि तुम्हारे धर्म, तुम्हारी नस्ल का वोट बैंक बढ़े। परंतु इन सब की कीमत क्या दी जा रही है? मानव निर्मित माहौल पर अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक शोध पत्र प्रकाशित किया है जो चौकाने जैसा है।
हमारी दैनिक उपयोग की वस्तुओं में कितने ही धीमे जहर घुल रहे हैं जो किसी न किसी दिन
किसी व्यक्ति के प्राण लेते रहते हैं। बेमतलब की सूचनाओं के कूड़े नीचे दबे लोग अपने
जीवन के साथ होनेवाले खिलवाड़ के बारे में अनभिज्ञ बने रहते हैं। हमारे जीवन में लेड
( पारा ) , कैडमियम और आर्सेनिक कितने ही अदृश्य रूप में प्रवेश कर रहे हैं और विश्व
में लाखों समयपूर्व मौतों के कारण बन रहे हैं। कई वृहद स्तर के अध्ययन इंगित कर रहे
हैं कि न्यूनतम मात्रा में भी यदि ये पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश करते रहते तो भी
हार्ट अटैक, लकवा या रक्त संचार संबंधित अन्य रोग पैदा कर सकते हैं। रक्त वाहिनियों
में प्रज्वलन, रक्त में अशुद्धि और शारीरिक दुर्बलता आदि स्थापित करके ये तत्व कितने
ही लोगों को युवावस्था में मौत की तरफ ले जा रहे हैं। यह एक चिंता की बड़ी बात है परंतु
आम जनता को इस बारे में अनभिज्ञ रखा जा रहा है।
लेड को हम घरेलू और औद्योगिक रंगों, तंबाकू, दूषित पानी, हल्के स्तर की पॉटरी, सिरेमिक
और कई किचन के बर्तनों में पाते हैं। इसके अलावा कुछ पानी के पाइप्स, मसाले, कॉस्मेटिक्स
तथा इलेक्ट्रॉनिक और औद्योगिक निर्माण कार्य से जनित प्रदूषण से भी लेड हमारे जीवन
में प्रवेश करता है। सिगरेट और बीड़ी से तो पास में बैठे परिवार के सामान्य सदस्य भी
प्रभावित होते रहते हैं। तंबाकू में लेड के साथ कैडमियम भी होता है तो दोहरी मार पड़ती
है।
कैडमियम हमारे जीवन में निकल कैडमियम बैटरी, रंग रोगन, प्लास्टिक, सिरेमिक एवम् ग्लास
और कंट्रक्शन के के सामानों द्वारा प्रविष्टि लेता है। औद्योगिक स्तर पर बने फर्टिलाइजर्स
रॉक फॉस्फेट का उपयोग बड़े स्तर पर करते हैं। रॉक फॉस्फेट में कैडमियम प्रचूर मात्रा
में होता है जो अन्न और सब्जियों द्वारा हमारे शरीर में प्रविष्ट हो किसी दिन हार्ट
अटैक द्वारा किसी भी व्यक्ति की जान ले सकता है। आर्सेनिक अधिकतर भूमिगत पानी में पाया
जाता है क्योंकि अधिकतर गरीब एवम् मध्यम वर्ग के लोग औद्योगिक इकाइयों के आस पास बसते
हैं और भूमिगत पानी को बिना किसी जांच और शुद्धिकरण के उपयोग में लेते हैं।
आपने अपने जीवन में कब सुना कि आपके यहां वायु और पानी में इन सब तत्वों की कोई जांच
हुई है? यहां सरकार तो जिम्मेदार है ही परंतु आम लोग भी आपाधापी और अहंकार में डूबे
यह भूल रहे हैं कि कब नमन कहते कहते स्वयं का नमन हो जायेगा यदि हम सब मिलकर हमारे
चारों तरफ फैले इन जहरीले पदार्थों पर रोक नहीं लगा पाए। धरती पर वस्तुओं का उत्पादन
कम और प्रकृति का संवर्धन अधिक होना चाहिए। सिर्फ औद्योगिक उत्पाद आधारित अर्थव्यवस्था
अल्पकाल में तो अच्छी लगती है पर अंत में बेहद हानिकारक होती है। फेसबुक में प्रकाशित
होती युवा लोगों की मृत्युपर्यंत की तस्वीरें भी यदि हमें जगा नहीं पा रही हैं तो हो
सकता है कहीं न कही आर्सेनिक ने हमारी भी तर्कसंगत क्षमता को कमजोर कर दिया हो।


1 टिप्पणियाँ
अत्यंत ग्यानवर्धक और चिंतनीय आलेख
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