जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

राजस्थान में तेल कंपनियों की ओर से लागू किए एमडीजी रूल्स 2022 के विरोध में प्रदेशभर के मार्केटिंग डिसिप्लिनेरी गाइडलाइन (एलपीजी) डिस्ट्रीब्यूटर्स ने खाद्य आपूर्ति मंत्री को शिकायत की है। डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन की इस शिकायत के बाद मंत्री ने नोटशीट लिखते हुए कंपनियों को इस रूल्स के तहत कार्यवाही नहीं करने के चेताया है। साथ ही इस रूल्स की समीक्षा के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाने के लिए कहा है।

मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि पिछले कुछ समय से लगातार डिस्ट्रीब्यूटर्स की शिकायतें आ रही है कि तेल कंपनियां एमडीजी रूल्स के नाम पर अनावश्यक परेशान कर रही है। इस रूल्स के पूरा नहीं करने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स को सस्पेंड किया जा रहा है और उन पर कमीशन का 50 फीसदी राशि तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। जबकि नियमनुसार कंपनियां आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी ऑर्डर 2000 और डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट के तहत ही कार्यवाही कर सकती है। इन सभी कानूनों से अलग हटकर कंपनियों ने ये नया रूल्स लागू करके डिस्ट्रीब्यूटर्स पर एक्शन लिया जा रहा है।

आपको बता दें कि इस नए रूल्स के तहत स्टॉक लिमिट, मार्केटिंग, ब्राण्डिंग, कस्टम सर्विस समेत अन्य कई मुद्दों को लेकर तेल कंपनियों के प्रतिनिधि डिस्ट्रीब्यूटर्स पर कार्यवाही करते रहते है। इसमें डिस्ट्रीब्यूटर्स पर फाइनेंशियल पेनल्टी लगाने के अलावा उसे सस्पेंड करने का भी प्रावधान है।

कमेटी की रिपोर्ट आने तक कार्यवाही नहीं करने के आदेश
मंत्री ने अपने निर्देशों में इस मामले का रिव्यू करवाने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इसमें विशिष्ट सचिव खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, निदेशक उपभोक्ता मामले विभाग, अतिरिक्त अधिवक्ता उपभोक्ता मामले विभाग, डीजीसीएम आईओसीएल, डीजीसीएम एचपीसीएल, डीजीसीएम बीपीसीएल और राजस्थान एलपीजी वितरक संघ के अध्यक्ष या प्रतिनिधि को सदस्य बनाया है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने तक सभी कंपनियों को इस नए रूल्स के तहत कार्यवाही नहीं करने के निर्देश दिए है।