प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से।
इस खबर से साथ जो वीडियो है वो आप चाहें तो देखें या फिर रहने दें। किसी को सड़क पर आखिरी साँसे लेते देखने में कौन सा आनंद है ?
लेकिन अगर आपने यह वीडियो देखा है तो आपको बता दें आपने शायद ध्यान से नहीं देखा। शनिवार को ऐसा ही कुछ प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस, जयपुर के गेट पर घटित हुआ था। आज का यह वीडियो अजमेर के जेएलएन अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने का है। कल और आज में अगर कुछ बदला तो वो है मरने वाला और उसके रिश्तेदार। जयपुर का वीडियो किसी अनजान शख्स ने बनाया था और अजमेर का वीडियो मरने वाली महिला के बेटे ने ही बनाया है।
तो सबसे पहले बात स्वास्थ्य सेवाओं की - स्वास्थ्य विभाग ने यह तय कर लिया है कि जब अस्पतालों में जगह ही नहीं है तो खामखां अंदर भीड़ करवा के जिनका इलाज चल रहा है उन्हें क्यों बेवज़ह तकलीफ दी जाए। ठीक भी है। लेकिन इसकी परिणीति यह कि लोग सडकों पर एड़ियां रगड़ रगड़ कर मर रहें हैं।
आपने गौर किया हो तो अजमेर के वीडियो में मरीज को एक मारुती वैन में अस्पताल लाया गया था। मतलब महिला एक मध्यम वर्ग के परिवार से थी। जयपुर में भी जिस महिला ने शनिवार को जान गंवाई उसे भी उसका भाई एक ऑटो रिक्शा में ले कर आया था।
तो अब कल्पना कीजिये उन लाखों लोगों की जिनके पास दो वक़्त खाने को भी नहीं है तो वो किसी एसएमएस अस्पताल या जेएलएन कैसे पहुंचेंगे ? मतलब वे तो वो शहीद हैं जिनका ज़िक्र कभी होगा ही नहीं।
अब सबसे अहम बात - सरकार बेहिस हो सकती है , कोई सरकारी विभाग और उसके कर्मचारी बेहिस हो सकते हैं लेकिन परिवार के सदस्य ? आपने गौर किया कि अजमेर का वीडियो खुद मृतक महिला के बेटे ने बनाया है और एक से अधिक बार अपनी मां के सड़क पर ही दम तोड़ने की बात कह रहा है। यानि जब अस्पताल वालों ने इस परिवार को अंदर दाखिला देने से मना कर दिया उसके बाद से ही बेटे ने तय कर लिया था कि अब वो अपनी मरती मां का वीडियो बनाकर सरकार, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलेगा। बिल्कुल प्रजातांत्रिक तरीका है और इसमें कुछ गलत नहीं है।
पर यह राजस्थान सरकार के लिए तुरंत संभलने का समय है। समझिये जनता भी मौत को स्वीकार कर संवदेनहीन होने लगी है, जो कि किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। इस मामले में मरने वाली महिला थोड़ी उम्रदराज़ थी हालांकि मां की कब कोई उम्र होती है ? वो तो बस मां होती है। अब आप कल्पना कीजिये कि प्रदेश में यही दृश्य जब किसी नौजवान के साथ पेश आएगा और खुदा न खास्ता उस वीडियो को किसी ने ने लाइव कर दिया। तब क्या होगा ? समाज की संवेदनशीलता एक पायदान और नीचे चली जाएगी।
जानते हैं ना इस पायदान के नीचे क्या है ?
सिर्फ घोर अराजकता। सावधान।

1 टिप्पणियाँ
इन शब्दों को सरकार को पुर असर तरीक़े से लेना चाहिए । बशर्ते यह संवेदनहीन न हो गए हो
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