प्रवीण दत्ता की कलम से।
सिरोही से स्वतन्त्र विधायक इन दिनों ट्वीट बाण मरने में महारत हासिल कर रहे हैं। वीकेंड कर्फ्यू के सन्नाटे को तोड़ते हुए लोढ़ा ने ठहरे हुए पानी में कंकर मारा है। संयम लोढ़ा ने किन्हीं 'मोटा भाई' के राजस्थान में रूचि नहीं लेने का ज़िक्र करते हुए अंदरखाने की एक बात उजागर की है। लोढ़ा के अनुसार 'मोटा भाई' ने सितम्बर तक अपनी पार्टी की राज्य इकाई को रुकने को कहा है। लोढ़ा के अनुसार इसके बाद 'मोटा भाई' सबसे बड़ी जहांगीरी घंटे वाली इमारत की मदद से राज्य के 'हाथी' से 'हाथ' हुए पलटीबाजों की क्लास लगाएंगे। अब चूँकि 'मोटा भाई' खांटी गुजराती व्यापारी हैं सो पिछले साल घोड़े खरीदने के लिए दिया हुआ एडवांस अब तक वापस नहीं लिया है। अब यह बात तो देश का बच्चा बच्चा समझता है कि आज की तारीख में आप एक बार कोरोना से आइस पाइस खेल सकते हो लेकिन 'मोटा भाई' का माल उनकी मर्ज़ी के बगैर खा कर चबा नहीं सकते, पचाना तो दूर की बात है। अब एडवांस लेने वालों की समस्या यह है की जब माल आया तो सब हरा ही हरा था। बना जी आने वाले थे और बदले राज में 20- 50 खोखे का उनके लिए कोई मोल है नहीं तो बस माल ए मुफ्त , दिल बेरहम - खा गए सारा माल। अब लौटना पड़ा तो लौटाएंगे कहाँ से। जादूगर ने भी अभी तक पुनर्वास योजना लैगून नहीं की नहीं तो किस्तों में चुका देते। यानि अगर संयम लोढ़ा की बात ठीक है तो सितम्बर के बाद कुछ हाथ या कटेंगे या फूल पकड़ लेंगे। वैसे गौरतलब है कि अन्दरखाने जादूगर ने एक 'विधायक संजीवनी योजना' चालू की है। वो चल गई तो साड़ी शक्ति जल में लगेगी और 'मोटा भाई गुजराती' मात खा जायेंगे 'बापू मारवाड़ी' से बट ऑफ कोर्स विथ द हैल्प ऑफ 'खमा घणी हुकुम'



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मज़ेदार भाषा
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