देश के साथ ही प्रदेश में भी ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार की स्थिति हो गई है। तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मरीजों के जीवन पर संकट गहरा गया है। हालात ये है कि सरकार को रोजाना निजी अस्पतालों की ओर से बार-बार ऑक्सीजन देने की गुहार की जा रही है। सभी अस्पताल अपने यहां ऑक्सीजन की कमी बता रहे हैं।
हर रोज हो रहे कोरोना के तेजी से प्रसार के चलते सरकारी हो या निजी अस्पताल सभी जगह बेड और ऑक्सीजन के लिए वेटिंग बढ़ती जा रही है। मरीजों की सांसें फूल रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि ऑक्सीजन की जितनी डिमांड भेजी जा रही है। उसके मुकाबले सिर्फ 10 फ़ीसदी ही मिल पा रही है। उधर, रेमडेसिविर इंजेक्शन भी डिमांड के मुताबिक केवल 20% ही मिल रहा है। अस्पतालों में बेड के लिए विवाद हो रहे हैं। सबसे बदतर स्थिति ड्रग विभाग के अधिकारियों की है जो हर मौके पर अब तक फेल साबित हुए हैं। दवा तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। मांग आते ही तत्काल हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। और तो और अस्पतालों की व्याख्या करें। S.m.s. अस्पताल में ही ऑक्सीजन के स्टॉक की मात्रा शून्य की ओर बढ़ रही है।
S.m.s. अस्पताल में शनिवार को इस कदर परेशानी बढ़ गई कि सिटी सर्जरी वार्ड के मरीजों को सीएस वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। सिटी सर्जरी हेड के हेड डॉक्टर राजकुमार यादव के अनुसार ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए पेशेंट शिफ्ट किए गए हैं। लेकिन दूसरी ओर दिक्कत की बात यह है कि यदि अस्पताल में होने वाली सप्लाई में जरा भी देर हुई तो ऑक्सीजन का प्रेशर कम होना तय है और इसके चलते मरीजों की जान पर भी संकट हो सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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