प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से 

 

गुरुवार 9 नवंबर राजस्थान विधानसभा चुनाव में नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख थी। जिस पार्टी या उम्मीदवार की जितनी सामर्थ्य थी उसने साम,दाम दंड और भेद की  'टाइम टेस्टेड' तकनीक इस्तेमाल कर अपना उल्लू सीधा किया। अभी तक ना तो कोई लेने देने का वीडियो सामने आया , ना मान-मनुहार का कोई ऑडियो और ना ही किसी किसी तरह का कोई भी निशाँ छोड़ा गया। कोई बेचारा परिवार या पार्टी के दबाव में आ गया तो 'निष्ठा और आस्था' एक साथ मिल गई। 

बहरहाल सबसे पहले सबसे रोचक किस्सा सूरसागर विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार और CM अशोक गहलोत जैसे दिखने वाले उनके खासम-ख़ास रहे पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने सूरसागर सीट से कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए नामांकन दाखिल किया था। गुरुवार सुबह उन्होंने रिटर्निंग अधिकारी के सामने पहुंचकर अपना नाम वापस ले लिया। दाधीच ने नामांकन वापस लेने की जानकारी देते हुए कहा- जिन लोगों ने मुझे मेरा नॉमिनेशन करने में मदद की, उन्हीं लोगों का दबाव था कि मैं नामांकन वापस लूं। इसको ध्यान में रखते हुए मैंने अपना नामांकन वापस लिया है। याद दिला दें कि सूरसागर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और जोधपुर के पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच ने बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने रविवार को मीडिया से बात कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने भारी शब्दों में कहा कि अशोक गहलोत से किसी भी प्रकार की नाराजगी नहीं है, लेकिन राजनीति में उन्होंने सूरसागर से कार्यकर्ताओं को अनसुना करके गलत किया है। कांग्रेस ने सूरसागर सीट से पूर्व प्रत्याशी प्रोफेसर अयूब खान के बेटे शहजाद खान को टिकट दिया है। इस सीट से कांग्रेस के 60 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने दावेदारी पेश की थी। कार्यकर्ताओं की मांग की थी कि इस सीट से मेहनती कार्यकर्ता को टिकट दिया जाए जो इस सीट से चुनाव जीते। अब एक सीट अल्पसंख्यक कोटे की एडजस्ट होनी सो हो गई। 

लेकिन नाम वापसी के बाद जो हुआ वो 'निष्ठा और आस्था' मिलने की असल कहानी है। नाम वापसी के बाद रामेश्वर दाधीच ने जो कुछ कहा वो आपने ऊपर पढ़ लिया है, एक बार फिर पढ़ें। इसके बाद रामेश्वर दाधीच ने अपना 'सिम' पोर्ट कर लिया। नहीं फोन का नहीं, विचारधारा का।  नाम वापसी के कुछ ही देर बाद रामेश्वर दाधीच दिखाई दिए एक हवाई जहाज के भीतर और उनके साथ थे भाजपा के राज्यसभा सांसद और जोधपुर के ही राजेंद्र गहलोत। 

कट टू दिल्ली        

कांग्रेस से बागी अशोक गहलोत के खास जोधपुर के पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच ने गुरुवार को BJP जॉइन कर ली भाजपा के राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी ने दाधीच को सदस्यता दिलाई। राष्ट्रीय मंत्री चुनाव सह प्रभारी विजया राहटकर, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, राजेन्द्र गहलोत, जोधपुर के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र सालेचा मौजूद रहे.

झोटवाड़ा से बीजेपी के बागी राजपाल सिंह शेखावत की कहानी राजकाज ने आपको पहले ही बता दी थी सो उनकी बात बस इतनी ही। जयपुर से ही सिविल लाइंस से बीजेपी के बागी रणजीत सोडाला भी फोन पर मिले ठंडे छींटों से मान गए। हवामहल से बीएसपी प्रत्याशी तरुषा पाराशर ने नाम वापस लिया और इस दौरान भाजपा प्रत्याशी बालमुकुंद आचार्य भी मौजूद रहे। वे एक्चुअली कोई चांस नहीं लेना चाहते थे ऐसा उन्हें उनके नए बने सारथी और पुराने मित्र सुरेश मिश्रा ने समझा रखा था। वो अपना कांग्रेस का अनुभव कहीं तो दिखाते ताकि फोटो/वीडियो वगैरह ऊपर भेजकर नई पार्टी में नंबर बन जाएं।  

सिविल लाइन से बसपा से अरुण चतुर्वेदी ने नामांकन वापस ले लिया और बताने की जरुरत नहीं कि यहाँ सिर्फ एक प्रत्याशी का 'जय परशुराम' बोलना ही काफी था। जयपुर में 'निष्ठा और आस्था' बसपा के एक नहीं दो नहीं बल्कि चार प्रत्याशियों को मिली वो भी बिना दल बदले। जयपुर शहर की चार सीटों से बीएसपी के प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया। सांगानेर से बीएसपी प्रत्याशी रामलाल चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पेंद्र भारद्वाज को समर्थन देते हुए नाम वापस लिया है। बताया जा रहा है कि चौधरी साहब के खुद के इसी क्षेत्र में प्रॉपर्टी वयवसाय से कुछ ताल्लुकात हैं जो उन्हें 'PRN' के विगत काफी समय से सबसे बड़े स्पेशलिस्ट की शरण में ले गए बस वहीं 'निष्ठा और आस्था' मिल गई। आदर्श नगर से बीएसपी प्रत्याशी हसन राजा ने भी लिया नाम वापस लिया,  उन्होने खुद तो कुछ बताया तो नहीं पर पर 'थोक सौदे' की बातें सिर्फ होलसेलर ही जानते हैं, रिटेलर बंधु दिमाग ना लगाएं। सुना है कि कल यानि जुम्मे से वे अगले 13 दिन राजा पार्क बर्फखाने के पास एक चुनाव कार्यालय में मिल जाया करेंगे। देखने जाएं तो ध्यान से जाइएगा उधर 'ट्र-फ़ीक' बहुत रहता है। हवामहल से कांग्रेस के बागी गिरीश पारीक ने भी मायूस होकर नाम वापस लिया लेकिन ज़ीरो डील। हवामहल सीट से 'जेंटलमैन' गिरीश पारीक एक स्वाभिमानी व्यक्ति हैं। सुलझे दिमाग के इस सज्जन ने CM गहलोत के व्यक्तिगत मुलाकात में कहने पर आर आर तिवाड़ी जैसे सच्चे कांग्रेसी के समर्थन में नाम वापस लिया।  स्थापित, साभ्रांत और सामाजिक व्यक्ति हैं सो इनको तो अपनी आत्मा की आवाज़ ही बहुत थी। काश राजनीति में ऐसे और आ जाएं। 

अब जल्दी से बात बाकि राज्य की....... सब जगह 'निष्ठा और आस्था' आप खुद ढूढ़ लीजियेगा।  वैसे पाठकों को इतना बता दूँ जहां जादूगर या मैडम का जरा सा भी साया दीखता वहां वे समझ लें कि नाम वापस लेने वाला प्रत्याशी अपना मोबाइल फोन अभी तक चूम रहा है, कमबख्त फोन ही ऐसी शख्सियत का आया था।  

कांग्रेस 

टोंक से कांग्रेस के बागी मोहसिन रशीद ने सचिन पायलट को समर्थन देने के नाम पर नाम वापस लिया. जहां जाना था वहां से कॉल नहीं आया तो पुराने कांग्रेसी ने घर वापसी में भलाई समझी।  

अजमेर दक्षिण से कांग्रेस के बागी हेमंत भाटी ने हार सामने देखी तो पार्टी के प्रति 'ओरिजनल' प्रेम और फिर लड़ने से होने वाले खर्चे ने इस प्रेम को और बढ़ा दिया।नोट - 'निष्ठा और आस्था' किसी भी रूप में मिल सकतीं हैं।  

मसूदा से कांग्रेस के बागी ब्रह्मदेव कुमावत ने समझदारी और समझाइश दोनों को काम में लिया। 

सूरतगढ़ से कांग्रेसी के बागी बलराम वर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी डूंगरराम गेदर को समर्थन दिया।  (व्यक्तिगत डील )

फलोदी से कांग्रेस के बागी कुंभसिंह जिस बात से नाराज थे वो पूरी करने का आश्वाशन मिला। 

राजाखेड़ा से बसपा प्रत्याशी धर्मपाल सिंह क्योंकि मायावती जी को राजस्थान कांग्रेस से जितनी चिढ है उतनी शायद स्थानीय बसपाइयों को नहीं।  

बीकानेर पश्चिम से RLP उम्मीदवार अब्दुल मजीद खोखर ने कांग्रेस प्रत्याशी बीडी कल्ला को समर्थन दिया क्योंकि टिकट देने की जल्दी में बेनीवाल ने प्रत्याशी के बैकग्राउंड को 'चैक' करना याद ही नहीं रखा। अब 'चैक' तो चैक होता हैं ना, बियरर हो या अकाउंट पेई। 

पीपल्दा से कांग्रेस की बागी सरोज मीणा ने भी नाम वापस लिया , यहां अपन जीरो। 

बड़ी सादड़ी से पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी (जय जननायक एंड रघुवीर मीणा )

झालरापाटन से शैलेंद्र यादव। बताने की जरुरत ही नहीं, राजकाज में पढ़िए एक दिन पहले कहां थी राजे। 

पिलानी से कांग्रेस के बागी अनुराग जोया - गलती सुधार। अब संगठन में पद। 

भाजपा 

सुमेरपुर से भाजपा से बागी मदन राठौड़ ( आजकल गज्जु बना हुकुम ही सबकुछ हैं जोधाणे में )

अजमेर उत्तर से भाजपा के बागी सुभाष खंडेलवाल और सुरेन्द्र सिंह शेखावत (लाला बना) पहले बात भाई की। लाला बना को मैंने कभी बना कह कर सम्बोधित ही नहीं किया। एक मददगार और हरदिल अज़ीज शक्स।  भावना में लिया खड़े होने का फैसला, इमोशन में ही लिया नाम वापसी का।  ये आदमी बिकाऊ नहीं हैं अभी तक। फिर 'मैडम' की वापसी के बड़े सिपहसालार होंगे। "बस इतना सा ख़्वाब है"। 

भरतपुर से बीजेपी के बागी गिरधारी तिवारी (जय परशुराम )

अपनी बात पर 

सरदारशहर से RLP प्रत्याशी लालचंद मूंड (निर्दलीय प्रत्याशी राजकरण चौधरी को दिया समर्थन)

बाड़मेर से RLP प्रत्याशी उम्मेदराम बेनीवाल (निर्दलीय डॉ प्रियंका चौधरी को दिया समर्थन)

बाकी जाट समाज के सर्वे सर्वा लगातार फोन करके पूरे प्रदेश में जाटों की टार्गेटेड (सीट टू सीट) वोटिंग के लिए जाट को जाट से लड़ने से रोक ही रहे थे और यही सबसे बड़ा कारण रहा।