अजमेर ब्यूरो रिपोर्ट। 

जयपुर-अजमेर हाईवे पर स्थित होटल में 11 जून की रात स्टाफ के साथ हुई मारपीट का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शराब पीकर होटल स्टाफ से मारपीट करने वाले आईएएस और आईपीएस को पुलिस लगातार बचाती रही है।

पहले गेगल थाना पुलिस दावा करती रही कि ये लड़के अलवर के हैं, वे इन्हें जानते नहीं हैं। इसी वजह से होटल मालिक की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। लेकिन, इस बीच जब सीसीटीवी फुटेज ने पूरे मामले की पोल खोल दी तो पुलिस एक बार फिर से आईएएस और आईपीएस को बचाने में लग गई।

इस मामले में पुलिस की ओर से पांच आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर रिपोर्ट हाथ लगी तो इसका खुलासा हुआ। इतना ही नहीं, जिन पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनकी भी गिरफ्तारी गेगल थाने के बाहर दिखाई गई। रिपोर्ट में बताया- मुकदमा दर्ज होने के बाद ये पांचों थाने के बाहर हंगामा करने लगे और धमकी देने लगे। पुलिस का मानना है कि अगर वे इन्हें गिरफ्तार नहीं करते तो ये आगे कोई संगीन अपराध कर सकते थे।

गेगल थाना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है- 12 जून को थाने के बाहर कुछ युवक हो-हल्ला कर रहे थे। इस पर एएसआई महेन्द्रपाल, रणदीप और मुकेश ने बाहर जाकर देखा तो चार-पांच लड़के इकट्ठा हो रखे थे। उनसे चिल्लाने और शोर मचाने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि आज हमारे खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज हुआ है।

पुलिस ने इन लोगों से समझाइश की, लेकिन आवेश में आकर कहने लगे कि हमारे खिलाफ जिसने भी झूठा मुकदमा दर्ज कराया है, उसको हम देख लेंगे। ये लोग उत्तेजित हो रहे थे और मुकदमा दर्ज कराने वाले को लेकर धमकियां देने लगे। ये लोग शांतिभंग करने पर उतारू हो गए थे।

ऐसे में गिरफ्तारी के अलावा कोई चारा नहीं होने से धारा 151 लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर समय रहते गिरफ्तार नहीं करते तो पुलिस की मौजूदगी में कोई संज्ञेय अपराध हो जाने संभावना थी। इनके बाहर रहने से थाना क्षेत्र की कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

इनकी दिखाई गिरफ्तारी

पुलिस ने आईएएस गिरधर के भाई सुरेन्द्र जाट, टोंक के पुलिस कॉन्स्टेबल मुकेश जाट, टोंक जिले में तहसील के कनिष्ठ सहायक हनुमान प्रसाद, टोंक पटवारी नरेंद्र सिंह दहिया और सीकर निवासी मुकेश जाट को गिरफ्तार किया। इनको बाद में एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से इन्हें जेल भेज दिया।

वो सात कारण जिससे साफ होता है कि पुलिस हंगामा करने वाले अधिकारियों को बचाती रही...

होटल में मारपीट हुई, पुलिस पहुंची, लेकिन कार्रवाई नहीं: होटल में 11 जून की रात मारपीट की घटना हुई। गेगल थाने को सूचना भी दी गई। पुलिस आई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा होटल स्टाफ को ही पीटने लगी।

अज्ञात के खिलाफ किया मामला दर्ज: मारपीट की घटना को लेकर होटल कर्मियों की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया। जबकि गेगल पुलिस को मालूम था कि आरोपी कौन हैं। रिपोट्‌र्स के अनुसार, एक बार नहीं, दो बार होटल कर्मियों के साथ मारपीट हुई।

सीसीटीवी फुटेज सामने थे: मारपीट की घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज सामने आए और आईएएस-आईपीएस के शामिल होने की पुष्टि हुई। इसके बावजूद एसपी ने 12 जून को एएसआई सहित तीन पुलिसकर्मियों को ही लाइन हाजिर किया। मामला चर्चा में आया तो सस्पेंड किए गए।

अपनी नई कहानी बनाई: पुलिस ने गेगल थाने में दर्ज अज्ञात के खिलाफ मुकदमे के बाद आरोपियों में शामिल आईएएस के भाई सहित 5 अन्य को गिरफ्तार दिखाया। इसमें उनका थाने के बाहर हंगामा करना बताया और धारा 151 में गिरफ्तारी दिखाई। जबकि शांतिभंग में तो सभी को मौके से ही गिरफ्तार किया जा सकता था।

सरकार से छिपाया: घटना में IAS-IPS के शामिल होने के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन ने सरकार से इस मामले को छिपाए रखा। जिसे लेकर 14 जून को सीएस उषा शर्मा ने भी वीसी में नाराजगी जताई। दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिए जाने के बाद स्थानीय जांच अधिकारी सीओ मनीष कुमार होटल पहुंचे और जानकारी ली। लेकिन अभी तक बयान दर्ज नहीं हुए हैं।

कमजोर धाराएं लगाई : घटना रात की थी और होटल में घुसकर सरियों-लाठियों से मारपीट हुई। यह बात शिकायत में है। इसके बावजूद मारपीट की धारा 341, 323, 143 में मामला दर्ज कर बचाया गया।

मेडिकल में लापरवाही: पुलिस की ओर से पीड़ित और दूसरे पक्ष के लोगों का मेडिकल घटना के दूसरे दिन भी नहीं करवाया गया। जब मामला सरकार तक पहुंचा, तब पुलिस ने 13 जून को पीड़ितों का मेडिकल करवाया। हालांकि, होटल मालिक ने अपने कर्मचारियों के मेडिकल खुद ही करवा लिए थे। लेकिन आईएएस-आईपीएस पर नशे में होने का आरोप था, लेकिन अब तक मेडिकल नहीं हुआ है।

होटल संचालक महेंद्र सिंह ने बताया क्या हुआ था उस रात

पहले आरोपी दो गाड़ियों में आए और मारपीट कर चले गए। इसके बाद उन्होंने गेगल थाना पुलिस को सूचना कर दी। गेगल थाने की पुलिस से गाड़ी पहुंची। इसी दौरान वो दोनों गाड़ियां भी वापस आ गईं और एक बार फिर होटल स्टाफ के साथ मारपीट की गई। इसके बाद वे गेगल थाना पहुंचे। वहां पुलिस ने बताया कि आरोपी अलवर साइड के लोग हैं। वे उन्हें नहीं जानते। इस कारण से अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अब बयान होने पर सभी के नाम जुड़ेंगे।

अब तक इनको किया गया है सस्पेंड...

  • अजमेर डेवलपमेंट अथॉरिटी के आयुक्त गिरधर (आईएएस)
  • नवगठित गंगापुर जिले के ओएसडी सुशील कुमार बिश्नोई (आईपीएस )
  • गेगल थाने के ASI रूपाराम, कॉन्स्टेबल गौतम और मुकेश यादव
  • टोंक के पुलिस कॉन्स्टेबल मुकेश जाट
  • टोंक जिले में तहसील के कनिष्ठ सहायक हनुमान प्रसाद
  • टोंक पटवारी नरेंद्र सिंह दहिया