जोधपुर के हिस्ट्रीशीटर दिनेश बंबानी और विक्रम नांदिया को पुलिस ने मंगलवार दोपहर 2 बजे गिरफ्तार किया है। दोनों पर एक-एक लाख रुपए का इनाम है। विक्रम नांदिया ने जोधपुर शहर में 1 फरवरी को वितराग सिटी में फायरिंग की थी।
विक्रम नांदिया को जोधपुर के भोपालगढ़ गांव की पहाड़ी से पकड़ा है। झंवर थाने की महिला थानेदार परमेश्वरी से हिस्ट्रीशीटर दिनेश बंबानी के साथ मिलीभगत का आरोप है। उसे भी जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस टीम ने चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों आरोपी जोधपुर के टॉप 10 बदमाशों में शामिल हैं।
गैंगस्टर कैलाश मांजू ने एक ऑडियो और वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया था कि झंवर थानाधिकारी परमेश्वरी ने उसके दुश्मन दिनेश बंबानी से 2 करोड़ रुपए लिए। अब बंबानी उसका मर्डर करवाना चाहता है।
तीन दिन से पुलिस कर रही थी निगरानी
कमिश्नर रविदत्त गौड़ ने बताया कि विक्रम नांदिया 2 महीने से भोपालगढ़ के गांव की पहाड़ियों पर छिपा था। 5 दिन पहले सूचना मिली थी कि विक्रम गांव के पास पहाड़ी में ही है, जो गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर है।
इस पर तीन दिन से पुलिस रेकी कर रही थी। इसी बीच इनपुट मिला कि एक व्यक्ति रोजाना विक्रम सिंह के लिए खाना लेकर जाता है। इसी आधार पर पुलिस टीम ने बदमाश को पकड़ने का प्लान बनाया। मंगलवार दोपहर उसे गांव की पहाड़ियों से ही गिरफ्तार किया।
गांव वाले देते थे पहरा, भाई के होटल से जाता था खाना
डीसीपी ईस्ट अमृता दुहन ने बताया कि विक्रम जिस पहाड़ी पर था उसके चारों तरफ गांव वालों की पहरेदारी थी। पुलिस की डीएसटी (डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम) दूरबीन से निगरानी कर रही थी। गांव में ही नांदिया के भाई बजरंग का होटल है। सुबह-शाम इसी होटल से खाना जाता था। इसी का फायदा उठाते हुए पुलिस ने नांदिया को पकड़ने की रणनीति बनाई।
डीसीपी वेस्ट गौरव यादव ने बताया कि आरोपियों को अभी बोरानाड़ा थाने में रखा गया है। इनसे पूछताछ जारी है।
दुश्मनी का लिया था बदला
करीब दो वर्ष पहले डाली बाई चौराहे पर ही राकेश मांजू ने विक्रम सिंह नांदिया पर फायरिंग की थी। उसका बदला लेने के लिए विक्रम सिंह नांदिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर 1 फरवरी को राकेश मांजू पर फायरिंग कर दी थी। दिनदहाड़े हुई इस गैंगवार के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई थी। इस घटना के बाद से विक्रम सिंह नांदिया फरार चल रहा था। इसके बाद पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
ऐसे हुई थी दुश्मनी
इस दुश्मनी की जड़ें 18 साल पुरानी हैं। 2005 में राकेश का भाई दिनेश मांजू और उसका दोस्त दिनेश बंबानी सट्टे का कारोबार चलाते थे। दोनों ने जाेधपुर में करोड़ों का सट्टा कारोबार खड़ा कर दिया था।
31 दिसंबर 2010 को दिनेश मांजू अपने साथियों के साथ नए साल का जश्न मनाने बाड़मेर गया था। इसी बीच आधी रात को होटल से रवाना होने के बाद श्रवण बाबल और स्वरूप सिंह सोढ़ा नाम के हिस्ट्रीशीटर ने दिनेश मांजू की हत्या कर दी। दिनेश बंबानी उसका बिजनेस पार्टनर था। ऐसे में एक बार मांजू के परिवार का शक बंबानी पर भी गया।
दिनेश की मौत के बाद उसके छोटे भाई राकेश मांजू और चाचा कैलाश मांजू ने दिनेश बंबानी से सट्टे के कारोबार का हिसाब मांगा। यहीं से इनके बीच दुश्मनी शुरू हो गई। बंबानी ने मांजू के भाई और चाचा को साफ मना कर दिया था कि वे सट्टे के कारोबार का एक भी रुपया नहीं देने वाला है। रंजिश बढ़ी और इनके बीच तीन बार फायरिंग भी हुई।
2018 में दिनेश बंबानी के घर फायरिंग हुई
मांजू और बंबानी के बीच मामला इतना बढ़ गया कि मार्च 2018 में दिनेश बंबानी के घर फायरिंग की गई। बंबानी ने इसका आरोप राकेश और कैलाश मांजू पर लगाया और चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में इनके खिलाफ मामला दर्ज करवाया।
इससे पहले जोधपुर के शास्त्री नगर स्थित एक मॉल के पास बंबानी पर मांजू गैंग ने 17 फायर किए थे। इनमें से एक गोली बंबानी के पैर में लगी थी। इस फायरिंग की घटना के बाद दोनों गैंग जान की दुश्मन बन गई।
दिनेश बंबानी पर जब फायरिंग हुई तब उसके साथ उसका दोस्त विक्रम सिंह नांदिया भी था। विक्रम ने ही उसे बचाया। इसके बाद भी राकेश मांजू ने दिनेश बंबानी को कई बार करोड़ों रुपए के सट्टे के कारोबार का हिसाब देने के लिए धमकाया। दोनों के बीच लगातार दुश्मनी बढ़ रही थी।
दो साल पहले विक्रम नांदिया ने राजू फौजी नाम के हिस्ट्रीशीटर को कैलाश मांजू को मारने के लिए 80 लाख रुपए की सुपारी दी। राजू फौजी भीलवाड़ा में 2 कॉन्स्टेबल की हत्या का आरोपी था और उस समय मारवाड़ में फरारी काट रहा था। राजू फौजी कैलाश मांजू की हत्या कर पाता, इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
राजू फौजी से पूछताछ में खुलासा हुआ कि कैलाश मांजू को मारने के लिए विक्रम नांदिया ने सुपारी दे रखी थी। इसके बाद राकेश मांजू ने विक्रम नांदिया को मारने का प्लान बनाया।
11 मार्च 2021 में विक्रम को मारी गोली
11 मार्च 2021 को शिवरात्रि के दिन राकेश मांजू के इशारे पर विक्रम सिंह नांदिया पर गोली चलाई गई। डाली बाई मंदिर के पास हमलावरों ने 8 फायर किए, जिनमें एक गोली विक्रम की कमर पर लगी। इसके बाद से ही दिनेश बंबानी और विक्रम नांदिया राकेश मांजू की हत्या की प्लानिंग कर रहे थे।
मांजू के चचेरे भाई सहीराम ने भी दावा किया था कि हमले के दौरान एक ही कार में बंबानी और विक्रम थे। उन्हीं के कहने पर शूटर्स ने राकेश को गोली मारी थी।


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