सवाई माधोपुर - हेमेंद्र शर्मा 
सवाईमाधोपुर नगर परिषद भ्रष्टाचार के मामले में अव्वल है। नगर परिषद के फर्जीवाड़े के इतिहास में एक पन्ना फर्जी डीडी का भी जुड़ गया है। संवेदकों ने तत्कालीन कैशियर से सांठगांठ कर निर्माण के टेण्डर लेने के लिए अमानता राशि के 56 लाख रुपए के बिना बैंक से जारी हुए फर्जी डीडी जमा करा दिए। इसका खुलासा तब हुआ जब वर्तमान खजांची ने डिमाण्ड ड्रॉफ्ट को सम्बन्धित बैंक में जमा कराया। बैंक ने डीडी उनकी शाखा से जारी नहीं होना बताकर वापस लौटा दिए। मामला सामने आने के बाद परिषद आयुक्त ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार कुल 56 लाख रुपए की राशि के लगभग 32-33 डीडी फर्जी होना सामने आया है। सभी डीडी बैंक ऑफ बडौदा शाखा खिरनी के नाम से जारी होना दर्शाया गया है। यानि लगभग 32-33 संवेदकों ने अमानता राशि के फर्जी डीडी जमा करा लाखों के ठेके हथियाए हैं। जाली डीडी का यह खेल जाने कब से चल रहा था। यदि अब भी पकड़ में नहीं आता तो संभवतया मिलीभगत के चलते यह फर्जीवाड़ा चलता रहता और ठेकेदार बिना राशि जमा कराए फर्जी डीडी पेश कर लाखों के ठेके हथिया कर चांदी कूटते रहते। गौरतलब है कि साल 2017-18 में नगर परिषद सभापति डॉ. विमला शर्मा थी। परिषद आयुक्त के पद पर जितेन्द्र शर्मा कार्यरत थे। वहीं कैशियर का काम सलाम नामक कर्मचारी देख रहा था। संवेदक द्वारा टैण्डर लेने के लिए अमानता राशि की डीडी जमा कराई जाती है और कैशियर द्वारा उन्हें नगर परिषद के खाते में भुगतान के लिए बैंक में जमा कराना होता है। लेकिन तत्कालीन खजांची ने ऐसा नहीं कर सभी डीडी अपने पास पटके रखी, जो उनकी संवेदकों से मिलीभगत उजागर करने के लिए काफी है। इतना ही नहीं कैशियर ने जिन संवेदकों के नाम टैण्डर नहीं खुला उन्हें डीडी वापस भी लौटा दी। यदि बैंक में जमा होती तो हो सकता है संवेदकों को लौटाई गई डीडी में से भी कई डीडी फर्जी पाई जाती। 
नगर परिषद के वर्तमान कैशियर ने जब चार्ज संभाला तो तत्कालीन खजांची ने उन्हें उक्त डीडी दी, जिन्हें कैशियर ने परिषद के खाते में भुगतान के लिए जमा कराया। परिषद के बैंक से डीडी सिकरने के लिए बैंक ऑफ बडौदा शाखा खिरनी को भेजी। बीओबी खिरनी ने डीडी मिलने पर उनकी जांच की तो उन्होंने डीडी अपने बैंक से जारी होने से मना कर दिया और वापस लौटा दिए। जब बैंक ने डीडी अपने होने से मना करते हुए वापस लौटाए तो नगर परिषद अधिकारियों को डीडी फर्जी होने का भान हुआ और तुरत फुरत में एक जांच कमेटी का गठन कर दिया। 
तीन सदस्यीय कमेटी कर रही जांच। बीओबी खिरनी से डीडी वापस लौटाने पर फर्जी होना पाए जाने पर नगर परिषद आयुक्त होतीलाल मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी में परिषद की जूनियर अकाउंटेंट ऋतु, सहायक अभियंता रानावत व एलडीसी सलाम शामिल हैं। अब ये तीनों जांच कमेटी के सदस्य यह पता करेंगे की डीडी किस-किस संवेदक के हैं। जांच के बाद रिपोर्ट परिषद आयुक्त को अग्रिम कार्रवाई के लिए सुपुर्द की जाएगी। नगर परिषद आयुक्त होती लाल का कहना है की निर्माण के 56 लाख रुपए की राशि के लगभग 32-33 डीडी (डिमाण्ड ड्रॉफ्ट) फर्जी होना सामने आया है। वर्ष 2017-18 के डीडी है, जिन्हें तत्कालीन कैशियर द्वारा अब तक भी जमा नहीं कराया गया था। नए कैशियर ने चार्ज लेने पर ये डीडी सामने आए, जिन्हें सिकरने के लिए बैंक में जमा कराया गया। सभी डीडी बीओबी खिरनी शाखा के है, जिन्हें बैंक ने खुद के यहां से जारी नहीं होना बताते हुए वापस लौटा दिए। डीडी की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। जांच के बाद ही सामने आएगा कि डीडी किस-किस संवेदक के हैं। इसमें तत्कालीन कैशियर की मिलीभगत सामने आई है, जिन्होंने डीडी बैंक में जमा नहीं करा अपने पास पटके रखा। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद ही अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वही अग्रिण बैंक प्रबंधक श्योपाल मीणा का कहना है कि डीडी की मियाद महज 90 दिन होती है उसके बाद उसे रिनिवल करवानी पड़ती है।
नगर परिषद में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके है ,फर्जी डीडी का मामला सामने आने के बाद नगर परिषद के भ्रष्टाचार में एक और भ्रष्टाचार का  अध्याय जुड़ गया । अब देखने वाली बात यह होगी कि इस फर्जी डीडी के मामले में संबंधित संवेदको एंव अधिकारियों के खिलाफ नगर परिषद द्वारा कोई कार्यवाही की जाती है या नही ।