जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

जयपुर नगर निगम हेरिटेज के एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र वर्मा को लेकर मेयर और कैबिनेट मंत्री आमने-सामने हो गए। मेयर मुनेश गुर्जर जहां वर्मा को निलंबित करने की मांग कर रही है, वहीं खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास एडिशनल कमिश्नर का समर्थन करते नजर आए।

मामले को लेकर खाचरियावास और महापौर के बीच खींचतान की भी चर्चा है। गुरुवार को मेयर मुनेश अपने समर्थक पार्षदों के साथ कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से मिलने पहुंची। मेयर ने बताया कि प्रदेश प्रभारी ने हमारी सभी समस्याओं को अच्छे से सुना है। वे हमारे साथ हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द इस समस्या का समाधान होगा।

क्या बोले मंत्री खाचरियावास
प्रभारी रंधावा से मीटिंग के बाद खाचरियावास ने कहा कि धरना हुआ है, लेकिन इसको लेकर मेरे से कोई इजाजत नहीं ली गई। न ही इस मुद्दे पर मेरे से कोई भी पार्षद मिला है। जो पार्षद धरने पर बैठे हैं, उनकी संख्या ज्यादा नहीं है। ऐसे में हम चारों विधायकों की मीटिंग बुलाएंगे। इसके बाद भी अगर जरूरत होगी तो पार्षद दल की मीटिंग होगी।

अधिकारी के खिलाफ कोई वीडियो नहीं
खाचरियावास ने धरना दे रहे पार्षदों के विपरीत एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र वर्मा के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्षदों को लेकर किसी अधिकारी का कोई वीडियो सामने नहीं आया। दलित के सम्मान के लिए हम सब खड़े हैं। हमने उनको भरोसा दिया है। निगम में अधिकारी के खिलाफ कोई वीडियो नहीं है।


छोटी-मोटी बातें तो होती रहती हैं

खाचरियावास ने कहा कि नगर निगम की समस्या को कैसे दूर करना है। उसको लेकर आज हम सब बैठे हैं। जो भी समस्या है। उसको दूर करना हमारी जिम्मेदारी है। हम सबने एक प्लान बनाया है, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से मिलकर पॉलिसी तय करेंगे। जो धरना दे रहे हैं वो सभी परिवार के ही लोग हैं। ऐसे में हम इस समस्या का जल्द ही समाधान करेंगे।

पीएचईडी मंत्री महेश जोशी ने कहा कि प्रभारी रंधावा ने बुलाया , इसलिए हम सब यहां पहुंचे थे। उनका जो भी आदेश होगा, वह पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को मंजूर है।

महापौर बोलीं- मैंने धरने से पहले खाचरियावास को कॉल किया था

प्रताप सिंह खाचरियावास की नाराजगी पर महापौर मुनेश ने कहा कि मैंने धरने पर बैठने से पहले सभी को मैसेज किया था। मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को भी मैंने कॉल किया था। इसके साथ ही उन्हें भी सभी की तरह लेटर लिखा था।