मुख्यमंत्री की वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम की घोषणा के बाद भी लागू नहीं होने पर भर्तियों की फीस युवाओं पर भारी पड़ रही है। सीएम ने बजट में बेरोजगार युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लगने वाले बार-बार शुल्क में राहत देने के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस की घोषणा की थी।
कार्मिक विभाग की ओर से 19 अप्रैल को जारी सर्कुलर के तहत सामान्य (अनारक्षित) अभ्यर्थी से 600 रुपए, आरक्षित वर्ग के लिए 400 रुपए और दिव्यांगजन के लिए भी 400 रुपए तय किया है। राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (सीफू) की ओर से आदेश जारी होने के बाद सात कैडर के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी कर चुका है, लेकिन वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम लागू नहीं हुआ। विभाग व भर्ती करने वाली एजेंसी की ओर से नियमों की पालना नहीं करने पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
ये फायदा : वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस प्रणाली से ही आवेदक सभी परीक्षाओं में बैठ सकेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बार-बार आवेदन शुल्क नहीं देना होगा।
आयुर्वेद विभाग से भी नहीं सीखा : आयुर्वेद विभाग ने 639 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी जोधपुर के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय को सौंपी थी, लेकिन वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम लागू करने व उम्र में छूट देने के लिए भर्ती को निरस्त करना पड़ा। अब विज्ञप्ति फिर जारी की गई है।
मुख्यमंत्री की ओर से बजट में वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम लागू की घोषणा कर चुकी है, लेकिन भर्ती एजेन्सियां अवमानना कर रही हैं। सरकार आदेश की पालना तुरन्त करवाए। -उपेन यादव, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ
छुट्टी पर हूं। वन टाइम रजिस्ट्रेशन फीस सिस्टम के बारे में सीफू के अधिकारियों से पूछिए। -सुरेश नवल, निदेशक (अराजपत्रित), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग


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