जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।  

भाजपा ने प्रदेश के जल जीवन मिशन (जेजेएम) व पेयजल प्रोजेक्ट के टेंडरों में हो रही गड़बड़ी व भ्रष्टाचार को लेकर अब राज्य सरकार को घेरा है। सांसद किरोड़ीलाल मीना ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जलदाय मंत्री महेश जोशी व एसीएस की शह पर जेजेएम व पेयजल प्रोजेक्ट में 20 हजार करोड़ का घोटाला होने का आरोप लगाया है। विभाग में हुए भ्रष्टाचार को लेकर मुख्य सतर्कता आयुक्त के साथ ही पुलिस थाने में शिकायत की जाएगी।

सांसद किरोड़ीलाल मीना ने कहा कि टेंडर को प्रभावित करने के लिए साइट विजिट का नियम डाला और इस विजिट का प्रमाण पत्र देने का अधिकार अधिकारी को दिया। ताकि अधिकारियों को टेंडर भरने वाले ठेकेदार का मालूम चल जाए। इससे टेंडर में पुलिंग हो गई और 40 फीसदी ज्यादा रेट पर वर्कऑर्डर दे दिया। फर्जी अनुभव व टर्नओवर प्रमाण पत्र के आधार पर टेंडर लिए जा रहे है।

साइट विजिट नियम से पूलिंग

सांसद मीना ने आरोप लगाया है कि 6 अक्टूबर 2021 से 24 नवंबर 2022 तक 10 हजार करोड़ के 11 कार्यों के लिए 48 टेंडर लगाए। इन निविदाओं में बिड से पहले साइट विजिट का प्रावधान रखा था। ताकि फर्मों को पुलिंग का मौका मिल गया। इन फर्मों को पुलिंग के चलते लागत तीस से चालीस प्रतिशत तक बढाने का मौका मिल गया, इस तथ्य को पीएचईडी विभाग की फाइनेंस कमेटी ने स्वीकृत भी कर दिया।

अधिकारीयों की मिलीभगत

सांसद मीना का आरोप है कि फर्म गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्रीश्याम ट्यूबवेल कं. ने फर्जी अनुभव व टर्नओवर प्रमाण पत्र लगा कर विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से दो साल में 900 करोड़ के टेंडर लिए है। इरकाॅन इंटरनेशनल लिं. ने 22 मार्च व 6 अप्रेल को विभाग को ईमेल से सूचित किया, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कोई कार्यवाही नहीं हुई।

विभाग का दावा : आरोप निराधार

जलदाय विभाग का दावा है कि जेजेएम को लेकर लगाए गए सांसद मीना के आरोप निराधार है। जेजेएम में केवल 16 हजार 500 करोड़ रुपए खर्च हुए है। ऐसे में 20 हजार करोड़ से जुड़े आरोपों में कोई आधार नहीं है। करीब 20 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स में निविदा दरें अधिक आने के बाद सभी टेंडर निरस्त कर दिए है। गणपति ट्यूबवैल के मामले की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में दस्तावेजों को सही मिले। वित्त समिति द्वारा गुण-दोष के आधार पर अनुमोदन किया। पुनः जांच करवाकर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।