जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
बिपरजॉय तूफान का असर जहां अब कम हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ इस तूफान पर सियासत का पारा चढ़ने लगा है। तूफान को लेकर भाजपा ने गहलोत सरकार पर लापरवाही का आऱोप लगाया हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि बिपरजॉय तूफान से प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है। तूफान को लेकर सभी सूचनाएं सरकार के पास पहले से थी। लेकिन उसके बाद भी सरकार का आपदा प्रबंधन फेल साबित हुआ। वहीं तूफान ने सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
सीपी जोशी ने कहा कि तूफान से 7 लोगों की जान चली जाने की सूचना हैं। सैंकड़ो लोग पानी में फंसे हुए हैं, कई घर ध्वस्त हो चुके हैं, अनेक लोग बेघर हो चुके हैं, कई गांव जलमग्न हो चुके हैं, लोगों के पास खाने पीने की वस्तुओं का अभाव है। कई लोगों के मवेशी मर चुके हैं और अस्पताल में पानी भरने से भर्ती मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीएम गहलोत को गुजरात सरकार से सीखना चाहिए
सीपी जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुजरात सरकार के आपदा प्रबंधन से सीख लेनी चाहिए, वहां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान आने के बाद भी किसी भी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई। गुजरात सरकार ने तूफान से प्रभावित लोगों को सहायता राशि प्रदान दी, जिससे लोगों को रोजमर्रा का रोजगार न होते हुए भी खाने पीने की वस्तुएं खरीदने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। बिजली के खंभे उखड़ने से बिजली की सप्लाई प्रभावित हुई उसे तुरंत सही कर दिया गया। वहीं प्रदेश में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान आने के बाद भी सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां पिछले दिनों से बिजली नहीं है। मुख्यमंत्री गहलोत आप सिर्फ झूठी घोषणाएं करने में व्यस्त चल रहे हैं और बाढ़ में फंसी जनता परेशान हो रही है।
सरकार विशेष आर्थिक पैकेज की करें घोषणा
नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर प्रदेश में बिपरजॉय तूफान से हुई तबाही एवं नुकसान से पीड़ित लोगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग की है। राठौड़ ने कहा कि मृतकों को 10 लाख रुपए व घायलों को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। वहीं राठौड़ ने जल्द ही टास्क फोर्स का गठन करने की भी मांग की।
राठौड़ ने कहा कि मौसम विभाग ने प्रदेश में तूफान को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मौसम विभाग की पूर्व चेतावनी के बाद भी प्रशासनिक तौर पर किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद, पाली, अजमेर, कोटा सहित कई जिलों में तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया हैं। राठौड़ ने कहा कि तूफान को लेकर राज्य सरकार ने आपदा से निपटने के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं किए। सिर्फ कागजी एडवाइजरी के कारण तूफान से निपटने की सरकार की तैयारी धरी रह गई है। राज्य सरकार ने ना तो टास्क फोर्स का गठन किया है और ना ही निचले इलाकों में भारी बारिश का पानी जाने से रोकने व प्रभावितों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने तथा पुर्नवास की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की। राठौड़ ने कहा कि राज्य आपदा प्रबन्धन राहत (एस.डी.आर.एफ.) कोष में लगभग 2750 करोड़ रूपये की राशि जिसमें 50 प्रतिशत राशि केन्द्रांश व 50 प्रतिशत राशि राज्यांश की उपलब्ध होने के बावजूद भी प्रदेश में अभी तक राहत कार्य प्रारम्भ नहीं किये जा रहे हैं।


0 टिप्पणियाँ