कोटा ब्यूरो रिपोर्ट।
आरटीएच बिल को लेकर चल रहा विवाद डॉक्टर और सरकार के बीच बातचीत होने के बाद खत्म हुआ ही था कि अब आरटीई यानी शिक्षा के अधिकार एक्ट को लेकर निजी स्कूल संचालक विरोध में आ गए है। कोटा में गुरुवार को स्कूल बंद किए गए और सभी निजी स्कूल संचालकों ने रैली निकाली। गुरुवार सुबह रैली सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट तक निकाली गई। जिसके बाद ज्ञापन देकर एक्ट में संशोधन की मांग की गई।
स्कूल एसोसिएशन के संजय शर्मा ने बताया कि सरकार, इस एक्ट में नए प्रावधान कर स्कूलों का दमन करना चाहती है। आरटीई एक्ट में पहले नियम था कि स्कूलों में जो सबसे छोटी कक्षा होगी उसमें ही आरटीई के तहत एडमिशन होगा लेकिन इस बार सरकार ने नर्सरी से लेकर फर्स्ट क्लास तक में एडमिशन खोल दिए। इसके बाद सरकार यह भी कह रही है कि प्राइमरी क्लास की फीस यानी नर्सरी से यूकेजी तक की फीस का पुनर्भरण नही होगा।
ऐसे में स्कूल कैसे संचालित किए जा सकेंगे। यह दमनकारी नीति सरकार अपना रही है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल सरकार के अनुदान पर नहीं चल रहे हैं। सरकार को इस नियम में संशोधन करना होगा। अगर मांगे नहीं मानी गई तो अभी सांकेतिक प्रदर्शन है और आगे स्कूल संचालक आंदोलन करेंगे।
यह है स्कूल संचालकों की मांग
प्राइवेट स्कूल संघर्ष समिति की तरफ से दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि प्राइमरी कक्षा में प्रवेश और पढ़ाई करवाने का शुल्क नही देने के आदेश जारी किए गए है जो कि गलत है और इसे वापस लिया जाए। छात्रावासों हॉस्टल में घरेलू दर पर बिजली दी जाती है जबकि अलाभकारी संस्था होते हुए भी स्कूलों में कॉमर्शियल कनेक्शन दिए जाते है जबकि दोनों जगह ही स्टूडेंटस है ऐसे में स्कूलों में भी घरेलू कनेक्शन दिए जाए। साथ ही स्कूल संचालकों ने यूडी टैक्स माफ करन की मांग भी रखी है और चेतावनी दी है कि अगर मांगे नही मानी गई तो आंदोलन चलाया जाएगा।


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