जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
सीएम अशोक गहलोत के नजदीकी कांग्रेस नेता और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया के फाउंडर चेयरमैन रहे सुपारस भंडारी ने बीस सूत्री कार्यक्रम समिति में जिला मेंबर बनाने पर नाराजगी जताई है।
सुपारस भंडारी ने बीसूका जिला मेंबर जैसी राजनीतिक नियुक्ति देने को खुद की तौहीन बताते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तल्ख लहजे में चिट्ठी लिखी है। सुपारस भंडारी ने उस तल्ख चिट्ठी को सोशल मीडिया पर भी डाला है। वे 2013 में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कभी आपसे पद मांगा नहीं तो ये सब किसने करने को कहा।
सुपारस भंडारी ने सीएम को भेजे लेटर में लिखा- 'मुझे फोन पर बताया गया कि जोधपुर जिले की बीस सूत्री कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए एक कमेठी गठित की है। इसमें सलीम भाई के साथ मुझे भी 12वें नंबर पर सदस्य मनोनीत किया है। ऐसा लगता है आपसे चर्चा करके यह लिस्ट नहीं बनाई गई है।
इस नियुक्ति से मुझे बहुत आघात पहुंचा है। आप ऐसा क्यों करेंगे, मैं आज भी यही मानता हूं कि मुझे नीचा दिखाने के लिए यह किसी नादान की करतूत है। आप तो हमेशा मेरा दर्जा बढ़ाने में थे।'
मैंने चेयरमैन पद नहीं लिया था, मेंबर पद से हटवाएं
भंडारी ने लिखा- 'यहां तक कि इस बार वाले कार्यकाल में भी आपने तो मुझे एक कमेटी का चेयरमैन बनाने का ऑफर दिया। उसे भी मैंने ही राजनीतिक हित में ना मानकर बाहर से ही उस विषय में जो मदद कर सकता था की। उसके बाद आप कुछ नहीं दे पाए, उसका मुझे कोई रंज नहीं है। तो ऐसा क्यों हुआ? आप तुरंत आदेश में से मेरे नाम को हटाने का आदेश दें।'
आप आकलन कीजिए आपके इर्द-गिर्द कौन ऐसे लोग हैं?
भंडारी ने सीएम को लिखा- आप आकलन कीजिए आपके इर्द-गिर्द कौन ऐसे लोग हैं, क्योंकि मैंने तो जीवन में जान बूझकर कभी किसी का बुरा करना तो दूर सोचा भी नहीं।
ऐसे लोगों के मंसूबों को नेस्तनाबूद करने के लिए यह संदेश, मैं खुद वायरल कर रहा हूं। ताकि लोगों को पता लगे कि आपने मेरे लिए क्या नहीं किया। अन्यथा मेरे प्रति तो हमदर्दी बढ़ेगी। आपके प्रति लोग मेरा उदाहरण देकर प्रश्न चिन्ह लगाएंगे। जो आज भी लगाते हैं।
मैंने एमपी-मेयर का टिकट नहीं लिया, अब मेंबर क्यों
भंडारी ने कहा- 'साल 2004 में आपने मेरा पाली से एमपी का टिकट फाइनल किया, इसके बावजूद मैंने मना किया। फिर 2010 में जोधपुर से मेयर के सीधे चुनाव में आपने मुझे उम्मीदवार बनाने को कहा तो मैंने पार्टी और आपके हित में रामेश्वर दाधीच को उम्मीदवार बनाने की पैरवी की।
आपने मुझे मेला प्राधिकरण का चेयरमैन बनाकर मंत्री पद से नवाजने की मंजूरी दी और मैंने ही एक बात आपको बताई कि मेलों-खेलों में कितनी भी बेहतरीन व्यवस्था क्यों ना हो, हादसों से नहीं बचा जा सकता है। जोधपुर किले पर हादसे ने हमें हिला दिया था। अगर मैं चेयरमैन बनूंगा तो सीधी गाज आप पर गिरेगी। तब आपने कहा यह तो मुझे किसी ने नहीं बताया और मैंने ही कहा आप किसी और को बना दें, आप खूब जानते हैं कि मैंने कभी पद की लालसा-लालच नहीं रखी।'
मैं मोदी लहर में धारीवाल से कम वोटों से हारा
भंडारी ने लिखा- '2013 के विधानसभा चुनाव में मुझे टिकट दिया और न केवल मेरा सम्मान बढ़ाया बल्कि भरोसा किया। मैं पच्चीस-तीस साल बाद जोधपुर लौटा फिर भी मैंने जमकर चुनाव लड़ा और मंत्री शांति धारीवाल से कम वोट से हारा। वो भी भारी मोदी लहर और आख़िरी दिन उनके आ जाने से।
आपने मुझे देने में कोई कमी नहीं रखी बाकी भाग्य और राजयोग सब करा देता है। मैंने विधान सभा क्षेत्र में काम कर लोगों को जोड़ा। 2018 में पार्टी मुझे टिकट नहीं दे पाई तब भी, किसी ने मेरे चेहरे पर शिकन तक नहीं देखी। मैं उन कुछ लोगों में था, जिसने उम्मीदवार बनाई गई मनीषा को उनके घर जाकर माला पहना कर संदेश दिया कि पूरी कांग्रेस साथ है।
मुझसे पांच लाख का चेक लेकर कर्ज मुक्त करें
भंडारी ने लिखा- मनीषा पंवार के नॉमिनेशन के बाद वाली मीटिंग में आपने मुझे बोलने का मौक़ा दिया और मैंने दिल से एक लाख रुपए हर साल जरूरतमंद कार्यकर्ताओं के लिए देने की घोषणा की। मुझ वर वह कर्ज है, वो कर्ज मुझ पर पांच लाख पहुंचने वाला है। मैंने तीनों अध्यक्ष से निवेदन किया मेरे से चेक लेकर कर्ज मुक्त कीजिए, पर ऐसा नहीं हो पाया, अब आप स्थानीय नेताओं से कहिए कि मेरे जापान से लौटते ही वह चेक लेकर मुझे कर्ज मुक्त करें।


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