जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।  

शुक्रवार को जयपुर के सिख समाज द्वारा शहर के गुरुद्वारे में बैसाखी का पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया गया। इसके तहत कई आयोजन किये गए।राजस्थान सिख युथ विंग के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह 'संटी' ने बताया कि सुबह अमृतकाल से ही समाज के लोगों द्वारा नित नेम के पाठ, सुखमनी साहेब के पाठ जगह - जगह शब्द कीर्तन और लंगर लगाए गए। गुरु गोविन्द सिंह पार्क गुरुनानकपुरा के गुरुद्वारे में सिख समाज ने कीर्तन दीवान सजाए। इस कार्यक्रम में आशा की वार कीर्तन के लिए हिमाचल प्रदेश से आये रागी जत्थे भाई कमलदीप सिंह एवं भाई तनमीत सिंह ने गुरुवाणी एवं अपने शब्द कीर्तन से निहाल किया। पंजाब से आये दाढ़ी जत्थे भाई सुखविंदर सिंह के कीर्तन के साथ साहेब सिंह जी का कथा वाचन हुआ जिसमें उन्होंने गुरु साहब की ज़िन्दगी पर प्रकाश डाला और संगत को निहाल किया।

हजारों श्रद्धालुओं ने टेका माथा, चखा लंगर का स्वाद

जयपुर के राजा पार्क स्थित श्री गुरु सिंह साहब गुरूद्वारा कमिटी के गुरमीत सिंह ने बताया कि हर साल गुरूद्वारे में शाम ७ बजे से दीवान सजाये गए। जिसमे रागी जत्थेदारों द्वारा शब्द कीर्तन किये गए। वही हजारों की संख्या में लोग गुरूद्वारे में माथा टेकने पहुंचे। संगत और पंगत की परंपरा को कायम रखते हुए समूचे सिखों ने साथ में लंगर प्रसाद भी चखा।

जयपुर के पानी पेच स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सिंह सभा के सूर्य उदय सिंह ने बताया कि गुरूद्वारे में सुबह से ही श्रद्धालु माथा टेकने आते रहे। इसमें वीर रास कीर्तन के लिए दाढ़ी जत्था भाई हरदीप सिंह एवं पटियाला वाले भाई बलजीत सिंह ने हाजिरी भरी। साथ में हजूरी रागी जत्था भाई गुरजीत सिंह नेहरू नगर पानीपेच ने शब्द कीर्तन कर निहाल किया।


कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर जयपुर शहर के सांसद रामचरण बोहरा, कालीचरण सर्राफ, अर्चना शर्मा, सुमन शर्मा सहित कई गणमान्य लोगों माथा टेकने पहुंचे। इस कार्यक्रम में राज्यपाल कलराज मिश्र भी आने वाले थे लेकिन उनके कोरोना संक्रमित होने के कारण वे नहीं आ सके। उन्होंने फ़ोन के माध्यम से समाज के सभी लोगों को बैसाखी की बधाई एवं शुभकामनायें दी।

साजना दिवस पर ही खालसे के नाम के पीछे 'सिंह' लगा था

मार्च 1699 से कई महीने पहले, गुरु गोबिंद सिंह जी ने वैशाखी दिवस पर आनंदपुर में एक विशेष मण्डली के लिए पूरे भारत से अपने अनुयायियों को आमंत्रित किया था। नतीजतन, उस विशेष दिन में सैकड़ों श्रद्धालु और दर्शक आनंदपुर साहिब में जमा हो गए थे। सतगुरु गोबिंद सिंह ने खालसा महिमा में खालसा को "काल पुरख की फ़ौज" पद से निवाजा है। तलवार और केश तो पहले ही सिखों के पास थे, गुरु गोबिंद सिंह ने "खंडे बाटे की पाहुल" तैयार कर कछा, कड़ा और कंघा भी दिया। इसी दिन खालसे के नाम के पीछे "सिंह" लग गया। शारीरिक देख में खालसे की भिन्ता नजर आने लगी। पर खालसे ने आत्म ज्ञान नहीं छोड़ा, उस का प्रचार चलता रहा और आवश्यकता पड़ने पर तलवार भी चलती रही।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में बैसाखी का त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बता दे कि बैसाखी का त्योहार वैशाख के महीने में मनाया जाता है। वैशाख महीने तक रबी की फसल पक जाती हैं और उनकी अच्छी पैदावार के लिए इस दिन अनाज की पूजा कर, ईश्वर का धन्यवाद किया जाता है। यह पंजाबी विशेषकर सिख समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस दिन समाज के लोग नए कपड़े पहनकर एक दूसरे से मिलते है, बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।