जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
जयपुर नगर निगम में इस साल यूडीटैक्स की रिकॉर्ड रिकवरी हुई है। इस रिकवरी के साथ ही नगर निगम पर अनुदान न मिलने का संकट मंडरा रहा था वो दूर हो गया। क्योंकि पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने प्रदेश की सभी नगरीय निकायों को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा वसूलने के लिए कहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में दोनों नगर निगम (ग्रेटर और हैरिटेज) में यूडीटैक्स 72.92 करोड़ रुपए की रिकवरी हुई है, लेकिन कल खत्म हुए वित्तवर्ष 2022-23 में रिकवरी 88.34 करोड़ रुपए की हुई है। नगर निगम में रेवेन्यू का सबसे बड़ा स्त्रोत यूडीटैक्स है। केन्द्र सरकार ने भी निकायों को हर साल ज्यादा से ज्यादा यूडीटैक्स वसूलने के लिए कहा है। पिछले दिनों जब केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र लिखा था तब उसमें यूडीटैक्स की वसूली 4.30 फीसदी की ग्रोथ रेट से वसूलने के लिए कहा था। ऐसा नहीं करने पर केन्द्रीय वित्त आयोग की तरफ से निकायों को जो फंड जारी किया जाता है उसे रोक लिया।
1.59 लाख प्राेपर्टी है जयपुर शहर में
जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज में 1.59 लाख से ज्यादा सम्पत्तियां है, जो टैक्स के दायरे में आती है। इनमें से ये टैक्स करीब 32 हजार प्रोपर्टी के मालिकों से ही वसूल किया गया है। वहीं सरकारी और कई ऐसी बड़ी निजी सम्पत्तियां है, जिन पर अब भी करोड़ों रुपए का यूडीटैक्स बकाया चल रहा है।
10 फीसदी देना पड़ेगा कमीशन
नगर निगम को यूडीटैक्स से भले ही इस बार रिकॉर्ड वसूली हुई हो, लेकिन इसमें से 10 फीसदी राशि नगर निगम को टैक्स वसूलने वाली एजेंसी को देनी होगी। नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज एरिया में अभी स्पैरो नाम से कंपनी यूडीटैक्स की वसूली करती है। इसके बदले कंपनी को 9.9 फीसदी राशि कमीशन के रूप में दी जाती है।


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