जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
जेईसीआरसी कॉलेज के सोशल क्लब अभ्युदय ज़रूरत ने 12 अप्रैल को अपना ग्यारवाँ वार्षिक महोत्सव मनाया। इस कार्यक्रम में 250+ से अधिक जरूरत से जुड़े बच्चे शामिल हुए एवं 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री अभिज्ञान प्रकाश भी शामिल हुए।
जरूरत - एक छात्र संचालित सामाजिक समूह है जिसमें स्वयंसेवक अपनी पढ़ाई में से कुछ वक़्त निकालकर जेईसीआरसी के छात्र छात्राएं जरूरतमंद बच्चों को ना केवल पढ़ाते है ब्लकि उनका समग्र विकास करने में मदद करते हैं। उन्हें बुनियादी शिष्टाचार, कविता पाठ करना, कहानी सुनाना आदि सिखाया जाता है। जरूरत अभी तक 4500+ बच्चों को पढ़ा चुका है और वर्तमान में 250+ बच्चों को ना की सिर्फ सी.बी.एस.ई और आर.बी.एस.ई की कक्षा तीसरी से आठवीं तक का संपूर्ण पाठ्यक्रम पढ़ाता है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए विभिन्न विद्यालयों में दाखिला दिलाने में भी सहायता करता है जहाँ वें अपनी शिक्षा मुफ्त में पूरी कर सकते हैं।बता दें कि जवाहर नवोदय विद्यालय जो कि बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करता है, वहाँ दाखिला लेना बहुत मुश्किल है, इसके बावजूद जरूरत के 6 बच्चे वहाँ दाखिला लेने में सफल हुए हैं।
बाल महोत्सव के दौरान जरूरत के एक वॉलिंटियर ने बताया कि जरूरत से पढ़े हुए बच्चों ने विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमाया है, उन्हीं में से एक छात्र राम आज सफल कोरियोग्राफर भी है, जो आज कई जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में डांस सिखा रहे हैं। जरूरत में पढ़ रही एक बच्ची के पिता कहते हैं कि " रोटी का इंतजाम भी बहुत मेहनत से होता है, इसीलिए बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने का वक्त नहीं मिलता। पर इस बात की खुशी है कि जरूरत की वजह से मेरी बेटी बढ़ पा रही है। "
वाइस चेयरमैन, जेईसीआरसी अर्पित अग्रवाल ने बताया कि उन्हें एक आदमी ने कहा था कि "बच्चे तो है परंतु साधन नहीं है", तो उन्होंने जरूरत के द्वारा इन बच्चों को साधन देने की ठानी। जरूरत का मुख्य उद्देश्य वंचित बच्चों को पढ़ा, उनको अपना भविष्य बनाने के लिए सक्षम बनाकर,समाज की मुख्य धारा में लाना है और यह उम्मीद जगाई कि जैसे-जैसे यह मुहिम आगे बढ़ेगी, भारत में इन वंचित बच्चों की संख्या कम होगी और यह बच्चे अपनी आने वाली पीढ़ी को पढ़ाने में सक्षम होंगे।
फैकल्टी कोऑर्डिनेटर आशीष कुलश्रेष्ठ ने कहा कि जरूरत में पढ़ रहे बच्चों की मुस्कुराहट और पढ़ने की इच्छा एवं जरूरत में निस्वार्थ भाव से पढ़ा रहे बच्चे उन्हें जरूरत को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि बाल महोत्सव में बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां जैसे ओपन माइक एस्ट्रोनॉमी सैशन व 3- डी मूवी भी आयोजित की गयीं जिनके द्वारा बच्चों ने मनोरंजक रूप में नई चीजें सीखी।

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