जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने 'भविष्य की सप्लाई चेन मैनेजमेंट -लचीलापन, स्थिरता और दृश्यता' विषय पर वार्षिक कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इसमें कॉन्ट्रैक्ट लॉजिस्टिक्स-एसएस सप्लाई चेन सॉल्यूशन के डायरेक्टर जसपाल गांधी ने कहा कि लोजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट में स्पीड ही सबकुछ है। उन्होंने लोजिस्टिक्स में स्पीड लाने के लिए संगठनों को उत्पादन और योजना से सावधान रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोविड काल ने उद्योग को कई स्रोतों में तब्दील कर दिया है।
एससीएम, आरएके सेरामिक्स (इंडिया) के महाप्रबंधक राजिंदर सिंह मान ने सप्लाई चेन प्रबंधन में दक्षता, मापनीयता और अनुकूलनशीलता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक अच्छी सप्लाई चेन पद्धति विकास और ग्राहक प्रतिधारण में सहायता करती है क्योंकि उच्च दक्षता के परिणामस्वरूप ग्राहकों की संतुष्टि में वृद्धि होती है। बाद में, उन्होंने सिरेमिक क्षेत्र और हरित उत्पादन में एससीएम पर भी चर्चा की।
बेक्टन डिकिन्सन इंडिया प्रा. लि. के प्लानिंग लीडर, सप्लाई चेन सौम्या मित्रा ने कहा कि जब यह टिकाऊ होगा तो किफायती होगा। प्रक्रियाओं को पुनर्जीवित करना और प्रौद्योगिकी के अधिक अनुकूल होना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि बाजार में बने रहने के लिए सप्लाई चेन प्रबंधन को मांग और आपूर्ति में व्यवधान को कम करने में काम करना चाहिए। कॉन्क्लेव की शुरुआत डॉ. श्रीकांत गुप्ता, एरिया चेयर, ऑपरेशंस एंड डिसीजन साइंसेज के स्वागत भाषण से हुई। पैनल डिस्कशन का संचालन डॉ. लोकेश विजयवर्गी ने किया। कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. प्रभात पंकज ने अतिथि वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट किए, जबकि डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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