जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
हाईकोर्ट ने सोसायटी पट्टों पर बिजली कनेक्शन नहीं देने से जुड़े अनियमितता मामले में सीएस से शपथ पत्र सहित यह बताने के लिए कहा है कि क्या पीआरएन व कच्ची बस्ती में बिजली कनेक्शन देने के लिए उनकी व जेवीवीएनएल की पाॅलिसी अलग है। वहीं अदालत ने राज्य सरकार से उस मीटिंग के मिनट्स भी पेश करने के लिए कहा है, जिसमें पीआरएन में सोसायटी पट्टों पर बिजली कनेक्शन देने के लिए मना किया था।
जस्टिस समीर जैन ने यह निर्देश बुधवार को कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की याचिका पर दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 मई तय की है। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश के पालन में जेवीवीएनएल के एमडी पेश हुए। अदालत ने उनसे पूछा कि क्या वे पीआरएन में बिजली कनेक्शन देने के लिए अधिकृत है या नहीं। जिस पर एमडी ने कहा कि कच्ची बस्ती वाले भी हमसे बिजली कनेक्शन मांगते हैं तो देते हैं, लेकिन पीआरएन में कनेक्शन के लिए सरकार ने ही अदालती आदेश का हवाला देकर मना कर रखा है। इस पर अदालत ने उनसे पूछा कि किस आदेश से मना किया है। जिस पर एमडी ने कहा कि पूर्व में सीएस की अध्यक्षता में मीटिंग हुई थी और उसमें ही पीआरएन में सोसायटी पट्टों पर कनेक्शन नहीं देने का निर्णय हुआ था।
जेडीए के अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने कहा कि अवैध निर्माण व बिना जेडीए पट्टे के बिजली कनेक्शन नहीं दिए जा सकते। जिस पर जेवीवीएनएल के अधिवक्ता विपिन गुप्ता ने कहा कि निर्माण अवैध है तो उसे तोड़ा क्यों नहीं गया। वहीं एएजी आरपी सिंह ने कहा कि सोसायटी पट्टों पर बिजली कनेक्शन दे दिए तो कोई जेडीए से पट्टे नहीं लेगा और इससे राजस्व का नुकसान होगा। प्रार्थियों के अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा ने बताया कि पिछली सुनवाई पर अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि पीआरएन में सोसायटी पट्टों पर बिजली कनेक्शन देने या नहीं देने के संबंध में उनकी क्या मंशा है। लेकिन इस सवाल का जवाब नहीं देने पर अदालत ने जेवीवीएनएल के एमडी को हाजिर होने के लिए कहा था।


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