श्रीगंगानगर - राकेश शर्मा 
भारतीय सेना में कर्नल और प्रतिभाशाली कवि कर्नल पंकजसिंह ने कहा है कि जो व्यक्ति संघर्ष करता है, वह कभी गुलाम नहीं होता। लेखक भी ऐसा ही होता है। 
वे रविवार को सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम "लेखक से मिलिए" में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लेखक सदैव परिस्थितियों से संघर्ष करता है, बुराइयों के खिलाफ लड़ता है, धारा के विपरीत बहने की कोशिश करके अपने को जिंदा रखता है। इसीलिए वह भी कभी गुलाम नहीं हो सकता।
कार्यक्रम के दौरान कर्नल पंकजसिंह ने अपने परिवार के सैन्य जीवन की चर्चा करते हुए कई रोचक और प्रेरणादायक बातें बताईं। इस दौरान उन्होंने अनेक जोशीली कविताएं सुनाकर वाहवाही लूटी। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय कोई जाति से नहीं होता। क्षत्रिय वह है, जो रक्षा करता है और प्रजा का पालन करता है। उनकी कविताओं में ओज था, प्रेरणा थी और कर्तव्य पथ पर न्यौछावर हो जाने की सीख थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी और सीए विजय अरोड़ा ने कहा कि पंकजसिंह की कविताएं सुनकर लगा कि एक सैनिक भी मन के कोमल भावों को इस प्रकार प्रकट कर सकता है कि अंतर्मन झूम उठे।
विशिष्ट अतिथि उद्योगपति एवं अपना घर आश्रम के अध्यक्ष राजेश जैन ने पंकजसिंह की कविताओं को समाज के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों में सक्रिय रहने की बात कही।
सृजन के संरक्षक समाजसेवी विजयकुमार गोयल ने कहा कि आज वीररस की कविता की ही आवश्यकता है और वह भी इतिहास से जुड़ी हो तो बात ही और होती है। 
कार्यक्रम के दौरान कर्नल पंकजसिंह को शॉल ओढ़ाकर, सम्मान पत्र एवं पुस्तक भेंट करके सृजन साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। संचालन संदेश त्यागी ने किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी भूपेंद्र सिंह, नवज्योत भनोत, अरुण शहैरिया ताइर, कृष्ण कुमार आशु, दौलतराम अनपढ़, मनीराम सेतिया, योगराज भाटिया, शिव जालान, आशाराम भार्गव, मीनाक्षी आहुजा, ममता आहुजा, सुषमा गुप्ता, तमन्ना, राजू गोस्वामी, महेश गहलोत, बीएस चौहान, बीना जेसानी, राजकुमार त्रजैन, सौरभ जैन आदि भी मौजूद थे।