जोधपुर ब्यूरो रिपोर्ट।  

राजस्थान में हुए 900 करोड़ के संजीवनी कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में अचानक से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) एक्टिव हो गया है। महीनों पहले मिली शिकायतों पर फिर से गौर किया जाने लगा है और तेजी से FIR दर्ज होने लगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 22 मार्च से 2 अप्रैल के बीच (11 दिन) जोधपुर, बाड़मेर और जालोर में 123 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के बाद SOG एक्टिव हुई है।

उधर, पीड़ित भी अचंभित हैं। जिन शिकायतों पर महीनों कोई कार्रवाई नहीं हुई, उन पर अचानक से पुलिस मेहरबान कैसे हो गई है। जिन शिकायतों को देकर पीड़ित कार्रवाई की आस छोड़ चुके थे, उन्हीं शिकायतों के आधार पर FIR हो रहे हैं।

थाने से आ रहे हैं कॉल
पीड़ितों का कहना है कि हमने तो मामले दर्ज नहीं करवाए। जब थाने से कॉल आया और वहां पहुंचे तब पता चला कि हमारी ओर से एसओजी ने केस दर्ज करवाए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी ओर से विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। कुछ पीड़ितों ने तो यह कहा कि पैसा वापस लौटाया जाए तो सही है, लेकिन सिर्फ राजनीति के लिए हमें फिर से परेशान किया जा रहा है, यह गलत है। थाने में दो-दो घंटे बैठाकर पूछताछ के नाम पर परेशान किया जा रहा है।

एक थाने में 4 से 5 मामले दर्ज

एक थाने में एक दिन में 4 से 5 मामले दर्ज हो रहे हैं। शनिवार को जोधपुर के बनाड़ थाने में 4, मथानियां थाने में 4, माता का थान थाने में 3 मामले दर्ज हुए हैं।

संजीवनी पीड़ित संघ के अध्यक्ष शांति स्वरूप वर्मा के अनुसार, SOG पीड़ितों की ओर से थाने में मामले दर्ज करवा रहा है। कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार एसओजी को मामले भेज रहे हैं।

वहां से पुलिस कमिश्नरेट और फिर संबंधित थानों में मामले दर्ज किए जा रहे हैं। अब इन मामलों में थाने अपने स्तर पर जांच करेंगे।

लिक्विडेटर ने जारी की विज्ञप्ति

22 मार्च को लिक्विडेटर ने विज्ञप्ति जारी कर सदस्यों से क्लेम की मांग की। इस पर पीड़ितों ने ऑनलाइन पोर्टल पर क्लेम की डिटेल दर्ज की। इस पोर्टल पर डिटेल दर्ज करने के बाद सहकारी विभाग में डॉक्यूमेंट जमा करवाए गए हैं। पीड़ितों ने अपनी एफडी के साथ डॉक्यूमेंट जमा करवाए। उस एफडी के आधार पर मामले संबंधित थानों में दर्ज हुए हैं।

प्रमोटर की संपत्ति जब्त नहीं की जा रही
संजीवनी पीड़ित संघ के अध्यक्ष ने बताया कि संजीवनी के कुल सदस्य 2 लाख 14 हजार हैं। उन्होंने पीड़ित संघ बनाया है। इसके 5 हजार 479 सदस्य हैं। इनलोगों ने FIR दर्ज नहीं करवाई है। मात्र FIR दर्ज करने से पीड़ितों की जमा पूंजी वापस नहीं मिल पाएगी। जब तक प्रमोटर की संपत्ति को जब्त नहीं किया जाता, तब तक पैसा आने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जो भी मामले थाने में दर्ज किए थे, वह एसओजी को सौंप दिए थे।

थाने से फोन आया तो पता चला कि मुकदमा हुआ है
पीड़ित भवानी सिंह ने बताया कि उन्होंने कोई FIR दर्ज नहीं करवाई थी। शनिवार को महामंदिर थाने से फोन आया। तब पता चला कि उनके नाम से मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के नाम से करीब 50 लाख रुपए संजीवनी में निवेश किए थे। इसकी तीन एफडी हैं। हर FD पर मामला दर्ज हुआ है। वर्तमान में उनके दो मामले दर्ज हुए हैं।

घर बेचकर 3 करोड़ सोसाइटी में लगाए
पीड़ित पारसमल जैन ने बताया कि उन्होंने अपना घर बेच कर 3 करोड़ रुपए सोसाइटी में लगा दिए। उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह से कई बार पूछा हमारा पैसा सुरक्षित है या नहीं तब वे बोले केंद्रीय मंत्री हमारे साथ हैं, आपका पैसा कहीं नहीं जाएगा।

साथ ही, मानजी के हत्थे में 200 फ्लैट की बिल्डिंग संजीवनी आनंदा दिखा कर बताया कि अगर कुछ हुआ तो यह बेचकर आपको पैसा चुकाएंगे। तब उन पर विश्वास किया। उन्होंने शेखावत के साथ की कई फोटो दिखाए। बताया कि गजेन्द्र सिंह शेखावत व उनके परिवार का इस सोसाइटी में सहयोग है। इसलिए हमने निवेश किया।

उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद बेटा हैंडीकैप है। पत्नी मानसिक विक्षिप्त। उन्होंने बोला कि शेखावत के पास जाते हैं तो वह हमें दोषी ठहरा कर बोलते हैं कि किसने कहा था निवेश करने को। आपकी गलती है निवेश क्यों किया?

राजनीति के लिए पीड़ितों को किया जा रहा परेशान
पीड़िता अरुणा ने बताया कि 35 लाख रुपए डूबने के बाद डिप्रेशन में आ गई थी। बहुत मुश्किल से इलाज के बाद अब थोड़ी ठीक हुई हूं। अब फिर से मामला गरमाने लगा है। शनिवार को हमें दो घंटे महामंदिर थाने में बैठा कर पूछताछ की गई। पैसा वापस लौटाया जाए तो सही है लेकिन सिर्फ राजनीति के लिए हमें फिर से परेशान किया जा रहा है, यह गलत है।

संजीवनी आनंदा अपार्टमेंट दिखा कर की ठगी

सोसाइटी में पैसा निवेश करने वाले पीड़ितों ने बताया कि जोधपुर के मानजी का हत्था क्षेत्र में संजीवनी आनंदा अपार्टमेंट में 200 फ्लैट बने हैं। 2015 में जब निवेश के लिए हमें राजी किया जा रहा था तब यह बिल्डिंग बन रही थी। बताया गया था कि 200 करोड़ की लिक्विडिटी के साथ हमारे पास यह बिल्डिंग भी है।

कहा था कि अगर कुछ होता है तो यह बेचकर मेंबर्स को पैसा दिया जाएगा। इस पर विश्वास कर निवेश किया। अब इस बिल्डिंग के अधिकांश फ्लैट बेच दिए गए हैं। इसके अलावा आरटीओ व बाड़मेर आदि क्षेत्रों में भी बिल्डिंग का हवाला दिया और निवेश करने के लिए दबाव डाला गया।