जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

हीमोग्लोबिन, सीरम फेरिटिन का लेवल बढ़ाने वाले, ग्लूटेन फ्री, प्रोटीन की ज्यादा मात्रा और डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले बाजरे के मानक तय किए है।

क्वालिटी पर सरकार की नजर रहेगी और जांच भी की जा सकेगी। बाजरे में नमी व यूरिक एसिड की मात्रा निर्धारित की गई है।

राजस्थान समेत देशभर में मानक एक सितंबर-2023 से प्रभावी होंगे। इसकी पालना के लिए राज्यों के फूड सेफ्टी कमिश्नर को लिखा है।

केन्द्र सरकार लगातार मोटे अनाज के उपयोग और उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इस साल बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिलेट यानी मोटे अनाज को ‘श्री अन्न’ नाम दिया।

अब FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक दूसरे संशोधन विनियम-2023 के अंतर्गत 15 तरह के मोटे अनाज बाजरा, रागी, कुट्‌टू, राजगीरा और ज्वार को शामिल किया है।

इधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में मिलेट कॉन्क्लेव-2023 इसी माह में आयोजित करने का निर्णय लिया है।

बाजरे के उत्पादन में राजस्थान पहले नंबर पर, पैदावार 4,685 टन वार्षिक

सदियों से बाजरा, जौ, ज्वार, मक्का जैसे मोटे अनाज उगाए जा रहे हैं। राजस्थान में करीब 5.5 करोड़ लोग खेती से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

राज्य सरकार इन घोषणाओं पर गंभीरता से काम करें तो राजस्थान में रहने वाले 7.50 करोड़ में से 5.50 करोड़ लोगों की तकदीर बदल सकती है।

देश में बाजरा उत्पादन में राजस्थान पहले नंबर है। कृषि मंत्रालय के अनुसार देश में 4,685 टन वार्षिक उत्पादन के हिसाब से राजस्थान पूरे देश में नंबर वन पर है।

राजस्थान के बाद 1939 और 1019 टन वार्षिक उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश और हरियाणा का नंबर आता है। राजस्थान के खेतों से निकलकर बाजरा दुनिया भर की भोजन थालियों में पहुंच सकता है।

  • मिलेट ग्लूटेन फ्री होने के साथ ही ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
  • बाजरे में गेहूं और चावल की तुलना में 3 से 5 गुना पोषक तत्व होते हैं। इसमें ज्यादा खनिज, विटामिन, खाने के लिए रेशे और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इससे अम्ल नहीं बन पाता। लिहाजा सुपाच्य होता है। उपलब्ध ग्लूकोज धीरे-धीरे निकलता है। लिहाजा यह मधुमेह मरीजों के लिए मुफीद है।
  • कैरोटिन, नियासिन, विटामिन बी6 और फोलिक एसिड आदि विटामिन मिलते हैं। इसमें उपलब्ध लेसीथीन शरीर के स्नायुतंत्र को मजबूत बनाने के साथ बाजरे में पोलिफेनोल्स, टेनिल्स, फाइटोस्टेरोल्स तथा एंटीऑक्सिडेंट प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। यही वजह है कि सरकार ने इसे न्यूट्री सीरियल्स घटक की फसलों में शामिल किया है। पोषण संबंधित इन खूबियों की वजह से बाजरा कुपोषण के खिलाफ जंग में एक प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।
  • कुपोषण से लड़ने के लिए वर्ष 2018 को बाजरा वर्ष घोषित किया गया। अब संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2023 को विश्व स्तर पर घोषित किया है। यूएनओ के अनुसार कोरोना काल के बाद बाजरा ही एकमात्र फूड है, जो लोगों की भूख भी शांत करता है और इम्युनिटी पावर भी बढ़ाता है।
  • एक्सपर्ट पैनल- डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. रमन शर्मा, पुनीत सक्सेना, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. सुधीर मेहता, डॉ.अशोक गुप्ता)

राजस्थान में 29 फीसदी रकबे की खेती
राज्य खेती (%)
राजस्थान 29
महाराष्ट्र 21
कर्नाटक 13.46
यूपी 8.06
मध्यप्रदेश 6.11
गुजरात 3.94
तमिलनाडु 4