जोधपुर जिले में बेमौसम बारिश से जीरा और ईसबगोल की पकी फसल तबाह हो गई है। कृषि विभाग ने 42 हजार हेक्टेयर में जीरा, 9 हजार हेक्टेयर में ईसबगोल, 38 हजार हेक्टेयर में सरसों और 6 हजार हेक्टेयर में चना की फसल में नुकसान बताया है।
रविवार की बारिश के कारण कटाई के बाद खेत में रखी और खेत में खड़ी जीरा, ईसबगोल, गेहूं, सरसों, चना की फसलों में 35 से 30 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। 9 हजार हेक्टेयर की ईसबगोल में 70 से 80 प्रतिशत और 42 हजार हेक्टेयर में जीरा की फसल में 50 प्रतिशत तक खराबा हुआ है। इसी तरह 70 हजार हेक्टेयर में खेत खलिहान में पड़ी व खड़ी गेहूं की फसल में भी खराबा हुआ है। सरसों में 38 हजार हेक्टेयर व चने में 6 हजार हेक्टेयर में नुकसान हुआ है। कृषि विभाग की ओर से खराबे की भेजी रिपोर्ट के अनुसार जिले में 1 लाख 6 हजार हेक्टेयर में फसलों में नुकसान हुआ है। इन फसलों का बाजार भाव से आकलन करें तो 1000 करोड़ से अधिक की फसलें खराब हो गई है। इससे पहले 4 मार्च व 7 मार्च को ओलावृष्टि से भी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था।
डांवरा, किरमसरिया, नवरा सिरमण्डी, गगाड़ी के किसानों ने बताया कि गांव में रविवार को हुई बारिश व तूफान से जीरा, गोल की फसल में 80 प्रतिशत तक नुकसान हो गया। बारिश में भीगने से जीरा काला पड़ गया है, वहीं ईसबगोल की फसल घुल गई है। किसान जोगाराम चौधरी, मेगाराम तरड़ ने बताया कि बारिश ने उनकी पूरी फसल चौपट कर दी। एडीएम रोहित कुमार (आपदा प्रबंधन) ने बताया कि बड़ी अक चापिणी, लोहावट, बाप, ओसियां, तिंवरी में पिछले दिनों ही 33 प्रतिशत से ज्यादा खराबा हो गया था।
1 लाख 49 हजार हेक्टेयर में जीरा की फसल
रविवार को हुई बरसात से 42 हजार हेक्टेयर में फसल खराब हुई है। यहां 4 लाख क्विंटल उत्पादन होना था। खराबे से 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, जिससे 2 लाख क्विंटल की फसल नष्ट हो गई। इसके वर्तमान बाजार भाव 25 से 30 हजार रुपए के अनुसार 600 करोड़ से ज्यादा का नुकसान है।
ईसबगोल में 144 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
रविवार को बरसात से 20 हजार हेक्टेयर में से 9 हजार हेक्टेयर में 80 प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान हुआ है। यहां 1 लाख 20 हजार क्विंटल का उत्पादन होना है, जिसमें से 96 हजार क्विंटल से फसल नष्ट हो गई। ईसबगाल के वर्तमान बाजार भाव 15 हजार क्विंटल चल रहे हैं। इस अनुसार 144 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
गेहूं की फसल हुई जमींदोज
बुवाई 70 हजार हेक्टेयर, 18 लाख क्विंटल का उत्पादन होता है। बेमौसम बरसात में गेहूं की फसल जमींदोज हो गई। यहां के गेहूं में कम रसायन उपयोग के चलते प्रति क्विंटल 300 रुपए अतिरिक्त मिलते हैं, लेकिन अब गुणवत्ता खराब होने से सामान्य से भी कम भाव मिलेंगे, जिससे किसानों को 105 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
सरसों, चना, जौ की फसलों में 45 हजार हेक्टेयर में खराबा
कृषि विभाग की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार इन फसलों में 45 हजार हेक्टेयर से ज्यादा में खराब हुआ जिससे 150 करोड़ से ज्यादा का नुकसान की आशंका है।
आपदा में किसानों को सिर्फ यह राहत
आपदा अनुदान के तहत तहसील क्षेत्र में सभी फसलों में खराबे का आकलन 33 प्रतिशत से अधिक होने पर प्रति हेक्टेयर 17000 रुपए से अधिक 34000 रुपए का आपदा अनुदान देने का प्रावधान है। जबकि एक ही हेक्टेयर में किसानों की लाखों का नुकसान हो जाता है।
फसल बीमा के क्लेम में यह प्रावधान
व्यक्तिगत क्लेम के दौरान फसल खराबे के प्रतिशत अनुसार उत्पादन में कमी के लिए पटवार मंडल स्तर पर 4 फसल कटाई प्रयोग से आए उत्पादन में से गत 7 वर्षों के औसत उत्पादन को घटाने पर उपज में कमी के अनुसार अधिकतम तक बीमित राशि तक बीमा क्लेम देय होता है।


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