करौली ब्यूरो रिपोर्ट।
उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कैलामाता के चैत्रीय लक्खी मेले में यूपी, एमपी, हरियाणा से लाखों श्रद्धालु आस्था के इस महाकुंभ में दर्शनों के साथ डुबकी लगाएंगे। करौली जिले की इस शक्तिपीठ कैलामाता के दर्शनों के लिए लाखों की तादाद में आने वाले श्रद्धालुओं के कदमों की आहट, भक्ति से कैला मैया की जय, जय माता दी के जयकारे इसी माह 15 मार्च से हिंडौन, सूरौठ की सुनी सड़कों पर दिन-रात सुनाई देंगे। प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है। वहीं पदयात्रियों के लिए भोजन, विश्राम, चिकित्सा जैसी सुविधाओं के साथ भंडारे 16 मार्च से संचालित होंगे।
बयाना मार्ग स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सामने करीब 4 बीघा भूमि पर 5 दिन पहले ही टैंट लगाकर पंडाल तैयार कराया जा रहा है। प्रतिदिन एक पारी में 10 हजार पदयात्रियों के लिए भोजन व्यवस्था के लिए जय भोले युवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित 12वें विशाल भंडारे में 50 हलवाइयों की बुकिंग की जा चुकी है। इसी के साथ 30 से ज्यादा कैटर्स लगाए गए है।
चिकित्सा कैंप में 5 अनुभवी नर्सिंग कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई। इसी के साथ 150 से ज्यादा स्थानों पर निशुल्क भंडारे शुरू होंगे। बता दें कि कैलादेवी के लक्खी मेले में आगरा, मथुरा, इटावा, कासगंज, मैनपुरी, किरावली, एटा, हाथरस, फतेहपुर सीकरी, सौंख, भरतपुर, मिढाकुर, रूपवास, अलीगढ़, फिरोजाबाद सहित हरियाणा के कुछ एक क्षेत्रों से कैलामाता के दर्शनों के लिए आने वाले पदयात्री हिण्डौन-बयाना मार्ग होकर लाखों की संख्या में पहुंचते है। शीतलाष्टमी से पदयात्रियों की चहलकदमी शुरू होती है। यह पदयात्रा करीब 5 दिनों तक चलती है। जिसमें 15 से 20 लाख यात्री यहां से गुजरते है। भंडारा समिति के प्रदीप गर्ग, मुकेश गर्ग, दिनेश गर्ग, छोटे बंडी भोला ,पिंटू खेड़ला ,अशोक गुप्ता ने बताया कि यहां भंडारे में करीब एक लाख से ज्यादा पदयात्री का ठहराव होता है।


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