हनुमानगढ़ - विश्वास कुमार 
जिन पर नियमों की अनुपालना करवाने की जिम्मेदारी वे स्वयं ही नही कर रहे नियमों की पालना। दरअसल मामला सरकार द्वारा चलाई जा रही आस्था कार्ड योजना से जुडा है।हनुमानगढ़ के आरटीआई कार्यकर्त्ता प्रवीण मेहन द्वारा जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ से जिले में आस्था कार्ड धारकों के परिवार से संबंधित सूचना मांगी गई थी।लेकिन हैरानी की बात ये की लोक सूचना अधिकारी एवं अपर जिला कलेक्टर ने यह जबाव लिखकर आवेदन वापस भेज दिया कि यह सूचना इस विभाग से संबंधित नहीं है।वही RTI (Activist) कार्यकर्त्ता प्रवीण मेहन जिला लोक सूचना अधिकारी के इस जवाब पर ताज्जुब करते हुए कहते है की राज्य सरकार की योजना का सम्बन्ध जिला कलेक्टर कार्यालय से नहीं है हांलाकि यह माना जा सकता है कि आस्था कार्ड का रिकॉर्ड इस कार्यालय में न हो।
फिर भी आवेदन वापस नहीं कर सकते,क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) में आवेदन आगे सम्बन्धित विभाग को प्रेषित करने का प्रावधान है ?इसकी अधिकरियों को ट्रेनिंग व निर्देश है।साथ ही अधिकारीयों की इस तरह की कार्यशैली पर मेहन सवाल उठाते हुए कहते है की अधिकारी कही सरकार की योजनाओं को पलिता तो नही लगा रहे है,क्या अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता से क्या सरकार अपनी योजनाओं को साकार कर पायेगी,क्या धरातल पर आमजन को इसका लाभ पहुंचा पायेंगे।खैर मीडिया में मामला आने के बाद सरकार को ऐसे अधिकारियो पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि RTI के नियमों की पालना सही से हो सके के और लाखों करोड़ो खर्च कर सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद तक पहुंच सके।वही जब इस RTI के इस जवाब प्रपत्र जो सोशल मीडिया पर डाला गया तो कई लोगों ने इस योजना पर भी सवाल उठाये और उनका कहना है की सरकारी योजनाओं का लाभ उचित तरीके से जरूरतमंदों को नही मिल पाता है।जिसके चलते वे अब प्रयास ही नही कर रहे है।