जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

राजस्थान के 81 विधायकों के प्रकरण में रोज नए मोड़ आ रहे हैं।  पहले विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा को विशेषाधिकार प्रस्ताव सदन में रखने की अनुमति दी और विपक्ष की हर दलील को ख़ारिज कर दिया।  इसके जवाब में आज विपक्ष ने विशेषाधिकार प्रस्तावों की झड़ी सी लगा दी। 6 भाजपा विधायकों ने दबाव में स्तीफे दिलवाने को आधार बनाकर कांग्रेस सरकार के चार मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ 6 विशेषाधिकार प्रस्ताव विधानसभा सचिव महावीर प्रसाद शर्मा के सामने पेश किए। उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, अशोक लाहौटी ने संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के खिलाफ, राम लाल शर्मा ने सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी, वासुदेव देवनानी ने मंत्री राम लाल जाट, अनीता बाहदेल ने उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी के खिलाफ और जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस विधायक रफ़ीक़ खान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव सौंपा। भाजपा ने इन प्रस्ताब का आधार विधानसभा सचिव महावीर शर्मा के उस जवाब को ही बनाया है जिसमें स्तीफे दबाव में देने की बात कही गई थी। 

संयम लोढ़ा के विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेंडिंग
संयम लोढ़ा के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर अब स्पीकर को फैसला करना है। अब बीजेपी ने मंत्री-विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव विधानसभा सचिव को सौंपा है, जिसमें इस्तीफा को ही आधार बनाया है।

31 जनवरी को विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ सीएम सलाहकार और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के मामले को स्पीकर के पास लंबित होने के बावजूद हाईकोर्ट में ले जाने पर राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ संयम लोढ़ा ने विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था।

संयम लोढ़ा का तर्क- स्पीकर के सामने मामला पेंडिंग, कोर्ट जाना विशेषाधिकार हनन
संयम लोढ़ा ने तर्क दिया था कि विधायकों के इस्तीफों का मामला विधानसभा स्पीकर के सामने लंबित था। स्पीकर के सामने लंबित होने के बावजूद राजेंद्र राठौड़ इस मामले को हाईकोर्ट में लेकर गए। स्पीकर के सामने मामला लंबित होने के बावजूद इसे कोर्ट में ले जाना स्पीकर की अवमानना के साथ ही विधानसभा सदस्यों के विशेषाधिकारों का हनन है।

संयम लोढ़ा ने विधानसभा में 31 जनवरी को प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि क्या विधानसभा हाईकोर्ट की सबऑर्डिनेट है? जब विधानसभा हाईकोर्ट में लंबित किसी मामले में दखल नहीं देता तो क्या हाईकोर्ट विधानसभा को डिक्टेट करेगा?