जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
भू-जल मंत्री डॉ. महेश जोशी ने विधानसभा में कहा कि राज्य में भू-जल दोहन के नियन्त्रण के लिए राज्य सरकार द्वारा शीघ्र ही राज्य भू-जल संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकर का गठन किया जाएगा। डॉ. जोशी प्रश्नकाल के दौरान इस संबंध में सदस्यों द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में भू-जल दोहन की स्थिति चिन्ताजनक है तथा राज्य में 151 प्रतिशत दोहन हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर इस संबंध में प्राधिकरण बनाने के लिए ड्राफ्ट विधि विभाग तथा वित्त विभाग को भेजा गया था तथा हाल ही में वहां से प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण भी किया जा चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही राज्य सरकार द्वारा प्राधिकरण का गठन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू-जल दोहन के संबंध में कोई भी निर्णय राज्य सरकार केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के आधार पर ही करती है। इससे पहले भू-जल मंत्री ने विधायक राजेन्द्र राठौड़ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि नीतिगत निर्णय की पालना में राज्य भू-जल विभाग प्रतिवर्ष नियमित रूप से सर्वे करता है तथा एक नियमित अंतराल के पश्चात राज्य के भू-जल संसाधनों का आंकलन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में केन्द्रीय भू-जल बोर्ड व भू-जल विभाग द्वारा संयुक्त स्तर पर राज्य के भू-जल संसाधन की नवीनतम आंकलन रिपोर्ट 2022 तैयार कर अन्तर विभागीय राज्य स्तरीय कमेटी से अनुमोदन कराकर जारी कर दी गई है। डॉ. जोशी ने बताया कि वर्तमान में भू-जल आंकलन की नवीनतम रिपोर्ट 31 मार्च 2022 के अनुसार राज्य के 295 ब्लॉक एवं सात शहरी क्षेत्रों में से 219 ब्लॉक को अतिदोहित श्रेणी, 22 संवेदनशील, 20 अर्द्धसंवेदनशील, 38 सुरक्षित में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष 3 ब्लॉक में भू-जल लवणीय होने के कारण रिपोर्ट में इनका भू-जल आंकलन नहीं किया गया है। उन्होंने सात शहरी क्षेत्र मे सम्मिलित - अजमेर, जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, कोटा, उदयपुर एवं बीकानेर का विवरण भी सदन के पटल पर रखा। भू-जल मंत्री ने बताया कि राज्य में भू-जल के समुचित उपयोग तथा राज्य के औधोगिक इकाइयों के सुविधा हेतु भू-जल संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के गठन की बजट घोषणा की पालना में विभाग द्वारा ड्राफ्ट बिल का प्रारूप तैयार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि विधि विभाग से प्राप्त सुझावों का समावेश कर ड्राफ्ट बिल वित्त विभाग को अनुमोद हेतु प्रेषित किया जा चुका है।