ब्रिटेन का एक घुमक्कड़ खोजी और धर्म प्रचारक था डेविड लिविंगस्टोन जिसकी अफ्रीका में कांगो की एक नदी के उद्गम को जानने के प्रयास में मृत्यु हो गई। लिविंगस्टोन के सपने को पूरा करने के लिए वेल्श में जन्मे अमेरिकन नागरिक हेनरी मोर्टेन स्टेनली ने बीड़ा उठाया। सन 1874 में उसने 350 लोगों के दल के साथ अपना अभियान प्रारंभ किया। यह अभियान अति खतरनाक माना गया था क्योंकि उस समय के कई अफ्रीकी लोग नरभक्षी हुआ करते थे। विक्टोरिया झील से प्रारंभ हुई यह यात्रा बड़ी धीमी गति से दो साल में न्यांगवे नामक जगह तक पहुंची। यहां स्टेनली ने टिप्पू टिब नामक एक अरबी व्यापारी का उसके एक हजार गुलामों के साथ सहारा लिया पर टिप्पु कोई तीन सौ किलोमीटर की कठिन और खतरनाक यात्रा से डर कर अलग हट गया पर स्टेनली ने हिम्मत नहीं हारी।
रास्ते में स्थानीय बाशिंदों के उसके तीस से भी ज्यादा युद्ध हुए पर वह आगे बढ़ता ही गया। सन 1877 में वह नदी को मापते हुए समुद्र तट पर पहुंचा पर इस प्रयास में उसके 114 साथी ही जिंदा रह पाए, बाकी युद्धों और बीमारियों से मारे गए। कांगो नदी को कभी जैरे नदी भी कहा जाता था। कांगो गणतंत्र और जांबिया के बरसाती घास के मैदानों से प्रारंभ हुई इस नदी में लगातार अनगिनत धाराएं मिलती रहती हैं और फिर ऊंचे पहाड़ी क्षैत्राें से नीचे की तरफ बहती हुई यह नदी विकराल रूप लेती जाती है। ये पहाड़ी क्षैत्र भारत जितने विशाल हैं और कांगो नदी अपने उद्गम से 47 हजार किलोमीटर तक प्रवाहित होती है और इसमें जो पानी बहता है उसके बारे में अध्ययन बताते हैं कि यह नदी समुद्र में प्रति सेकंड 41,700 टन पानी फैलती रहती है और ऐसा सदियों से होता आ रहा है। विश्व में अमेजन नदी के बाद यह सबसे विशाल और लबालब भरी नदी है।
सन 1482 में एक पुर्तगाली घुम्मकड़ ने यूरोप में इस नदी का जिक्र किया था पर किसी ने अगले चार सौ साल तक इसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया। यह नदी कुछ स्थानों पर बहुत पतले पहाड़ी कटावों से गुजरती है और फिर पानी गर्जना के साथ घूमता हुआ अति तीव्र गति से नीचे की तरफ गिरता है और दिल को दहला देता है। स्थानीय लोग इसे नरक का दरवाजा कहते हैं क्योंकि यदि कोई जीव इसमें फस जाए तो उसके शरीर की लुगदी बन जाती है। यहां से नदी जंगलों को चीरती हुई खतरनाक रास्ते बनाती हुई सागर की तरफ बढ़ती है। अपने रास्ते में यह सात झरने बनाती है जिनमें विश्व का सबसे ज्यादा पानी गिरता है - 167,000 टन पानी प्रति सेकंड इन झरनों में प्रवाहित होता है।
कांगो की राजधानी किंशासा पहुंचने से पहले नदी में कितनी ही अन्य धाराएं भी मिल जाती हैं। राजधानी पहुंचते पहुंचते नदी काफी शांत हो जाती है और इस पर कई हाउस बोट्स तैरते नजर आते हैं। नदी के आखिरी भाग में किंशासा से आगे मनमोहक लिविंगस्टोन झरना है। इस झरने से आगे नदी पूरी तरह से अनियंत्रित और अत्यधिक खतरनाक रूप धारण कर लेती है जब यह क्रिस्टल पहाड़ से एक पतले नाले के रूप में 260 मीटर नीचे गिरती है और 350 किलोमीटर तक अत्यधिक वेग से भागती है। इस आखिरी बहाव को लोग नरक में उतार का नाम देते हैं। यहां से 145 किलोमीटर चलकर यह अद्वतीय नदी अटलांटिक महासागर में समा जाती है।





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