आलोचना विधा में काम करना थोड़ा मुश्किल है। यह गहन अध्ययन की मांग तो करती ही है, साथ ही तटस्थभाव से समालोचना की प्रेरणा भी देती है।यह बात वरिष्ठ आलोचक एवं कवयित्री डॉ. नवज्योत भनोत ने सृजन सेवा संस्थान की ओर से आयोजित ‘लेखक से मिलिए एवं सृजन शिक्षक सम्मान’ समारोह में कही। यह कार्यक्रम पूर्णत: शिक्षकों को समर्पित था। कार्यक्रम में जहां तीन शिक्षकों को सृजन शिक्षक सम्मान दिया गया, वहीं कार्यक्रम का संचालन भी शिक्षकों ने किया, सम्मानितों का परिचय भी शिक्षकों ने दिया और सम्मानित भी शिक्षकों के हाथों से करवाया गया। कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी व्याख्याता डॉ. नवज्योत भनोत ने अपनी कुछ कविताओं का वाचन भी किया। इनमें जहां गांव की सोंधी मिट्टी की खुशबू महसूस की जा रही थी, वहीं मानवीय संबंधों की पड़ताल भी इनमें हो रही थी। कई कविताएं तो मन को छूने वाली थीं। इनमें मां, शब्दों के सेतुबन्ध और वे लड़कियां प्रमुख थीं। प्रश्नोत्तरी सत्र में मीनाक्षी आहुजा, सुषमा गुप्ता एवं ऋतुसिंह ने कुछ सवाल किए, जिनके डॉ. नवज्योत भनोत ने बहुत सहजता से जवाब दिए। कार्यक्रम में डॉ. नवज्योत भनोत के साथ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, फूसेवाला के वरिष्ठ अध्यापक एवं रंगकर्मी हरविंद्रसिंह तथा नोजगे पब्लिक स्कूल में अंग्रेजी व्याख्याता विनीता मित्तल को शॉल ओढ़ाकर एवं सम्मान प्रतीक एवं पुस्तक भेंट करके सृजन शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया। हरविंद्रसिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वे ये सम्मान पाकर गौरवान्वित हैं और अपने शिक्षक धर्म को और बेहतर तरीके से निभाने का प्रयास करेंगे। विनीता मित्तल ने कहा कि उन्होंने जिन लोगों से सीखा, उनमें नोजगे स्कूल के चेयरमैन डॉ. पीएस सूदन प्रमुख हैं, उन्हीं की प्रेरणा से वे आज अपनी पहचान बना पाई हैं। सम्मानित शिक्षकों का परिचय क्रमश: डॉ. बबीता काजल, अरुण शर्मा एवं सुषमा गुप्ता ने दिया। सृजन के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ‘ताइर’ ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. संदेश त्यागी ने किया। कार्यक्रम में आनंद मायासुत, सुरेंद्र सुंदरम, कृष्णकुमार आशु, अरुण खामख्वाह, संदल कौर, बनवारीलाल शर्मा, बालकृष्ण लावा, विजय भाटिया, सुनील मित्तल, आशाराम भार्गव, भूपेंद्रसिंह, प्रियंका गुप्ता, द्वारकाप्रसाद नागपाल, निष्ठा गुप्ता, डॉ. मधु वर्मा, ममता आहुजा, राजेंद्र जांजिड़, जीपी सिंह, नवी आहुजा एवं सुशीलाकुमारी सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।
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