राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह ने प्रार्थी यशवंत सिंह के पक्ष में दायर रीट याचिका में स्थगन आदेश पारित किया। प्रार्थी की और से पैरवी भावना चौधरी अधिवक्ता ने की। संक्षेप में तथ्य यह हैं कि प्रार्थी खण्डीय लेखाकार के पद पर अधिशासी अभियंता खण्ड संसाधन विभाग सीकर में रिक्त पद पर अतिरिक्त कार्य कर रहा है। उसका कार्य पूर्णता संतोषजनक रहा है। अब महालेखाकार राजस्थान के कार्यालय के आदेश से एक अन्य व्यक्ति को प्रार्थी के पद पर पदस्थापित कर दिया है। इस संबंध में संबंधित विभाग से कोई पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई है।भावना चौधरी का तर्क था कि अधिशासी अभियंता ने बार बार निदेशक कोष एवं लेखा राजस्थान से इस संबंध में मार्गदर्शन चाहा गया है किन्तु कोई स्पष्ट दिशानिर्देश प्राप्त नहीं हुए। भावना चौधरी का तर्क था कि प्रार्थी के संबंध में कोई भी आदेश पारित किए बिना अन्य व्यक्ति को उसी पद पर पदस्थापना करना अनुचित व ग़ैर क़ानूनी कार्यवाही होगी। भावना चौधरी का तर्क था कि अन्य व्यक्ति की पदस्थापना प्रार्थी के पद पर किया जाना ऐसा दर्षाता है कि महालेखाकार कार्यालय ने बिना दिमाग लगाए अन्य व्यक्ति को प्रार्थी के पद पर लगा दिया है जो कि नियम विरुद्ध व ग़ैर क़ानूनी है अतः प्रार्थी के पक्ष में स्थगन आदेश पारित किया जाए। न्यायाधीश ने भावना चौधरी के तर्कों से सहमत होते हुए आदेश दिया कि प्रार्थी को उसके पदस्थापित स्थान पर कार्य करने दिया जाए। अप्राथीगणों को याचिका के नोटिस जारी किए।
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