जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा ने सरपंचों के महापड़ाव स्थल पर पहुंचकर सरपंचों से मुलाकात की। इस दौरान महापड़ाव स्थल पर सरपंचों ने मीणा के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। दरअसल ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा ने 7 जिलों में हुए मनरेगा के कामों की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ने 7 जिलों- बाड़मेर, नागौर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बीकानेर, झालावाड़ और उदयपुर में अनियमितता और घोटाले का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया कि 150 करोड़ से 500 करोड़ रुपए तक अमाउंट के काम दिखाए गए हैं, लेकिन ग्राउंट पर उतना काम हुआ ही नहीं है। ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री मीणा ने यह भी आरोप लगाया था कि मनरेगा में जिस काम का मजदूरों को भुगतान किया जा रहा है, वह धरातल पर दिख ही नहीं रहा है। सबसे ज्यादा अनियमितता नागौर और बाड़मेर जिले में हुई है।उन्होंने कहा कि सभी सरपंच गलत नहीं है मैं सरपंचों के खिलाफ नहीं हूं बल्कि जो है और अनिमियता मिलेगी वहा पर उनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि गरीब व्यक्ति तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचे। और जिस का हक है उसे मिले यही कारण है कि गड़बड़ी करने वाले सरपंच और जो सरपंच नहीं है वह भी सरपंच संघ के पदाधिकारी बने हुए हैं ऐसे में जांच से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि बाड़मेर में एक ही परिवार में 2 से 3 तक के जॉब कार्ड बना दिए गए और कई ऐसे कार्य दिखाए गए हैं जो धरातल पर ही नही पाये गए।। उन्होंने कहा कि मैं इस्तीफा देने से डरता नहीं हूं लेकिन गलत काम को मैं नहीं होने दूंगा जांच होगी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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