करौली ब्यूरो रिपोर्ट।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ खुशीराम मीना ने बताया कि राजस्थान मे वर्तमान मे गौवंश एवं अन्य पशुओं में लम्पी स्किन रोग के प्रकरण आ रहे है। चूंकि यह एक विषाणु जनित रोग है जिसके ईलाज के लिए कोई दवा सुनिश्चित नहीं है सिर्फ रोकथाम और बचाव ही एकमात्र उपाय हैै। संयुक्त निदेशक ने वायरस के रोग व लक्षणों मे बताया कि यह वायरस मुख्यरूप से गौ एवं भैंस वंशीय पशुओं में फैलने वाला संक्रामक रोग है यह वैक्टर यानि मच्छरों, मक्खियो और चीचड आदि के द्वारा एवं पशुओं की लार, स्त्राव तथा संक्रमित जल व चारे के माध्यम से पशुओ मे फैलता है।गौवंश की त्वचा पर 2 से 5 सेमी. की गोलाकार गांठ व संरचनाऐं उभरती है।इसमे तेज बुखार, आंख व नाक से लार का आना, छाती व पेट के आसपास सूजन तथा दूध का अचानक से कम हो जाना आदि रोग के लक्षण है।रोग की रोकथाम के संबंध मे संयुक्त निदेशक ने बताया कि गौवंश के अनावश्यक आवागमन पर प्रतिबंध, गौशालाओं के गौवंश को गौशालाओं मे ही रखना व आने वाले नये गौवंश को स्वस्थ्य पशुओं से अलग बाडे मे रखना, पशुओं मे प्रारंभिक लक्षण देखते हुए पशुओं को तुरंत अन्य पशुओं से अलग करना, रोगी पशु की देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी स्वस्थ्य पशुओं से दूर रखना व हाथों को सैनेटाईजर से साफ करना, बाडे की प्रतिदिन साफ सफाई, मच्छर, मक्खियों व चीचड की रोकथाम के लिये मैलाथीऑन, साईपरमेथ्रिन, सोडियम हाईपोक्लोराईड आदि का छिडकाव करना, बाडे मे गोबर के कंडे व नीम की पत्तियों को जलाकर धुआं करना, स्वस्थ्य गौवंश को समुचित पशु आहार व हरा चारा समुचित मात्रा मे उपलब्ध करावें जिससे कि पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।इसके अलावा उन्होने बताया कि रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखते ही स्थानीय पशु चिकित्सा केन्द्र पर सूचित करें साथ ही पशु चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन मे रोगी पशु की चिकित्सा एवं रोग के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकें।उन्होने बताया कि इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की समस्या आने पर जिला नोडल अधिकारी डॉ गंगासहाय मीना उपनिदेशक के मोबाईल नं. 9414747831 पर संपर्क कर सकते है।

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