जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
ईस्टर्न कैनाल योजना परियोजना ( ईआरसीपी) को लेकर अब भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को दौसा जिला मुख्यालय के पास मीणा हाईकोर्ट नांगल प्यारीवास में जल क्रांति आंदोलन का ऐलान किया है। जनसभा में राज्य सरकार से ईआरसीपी प्रोजेक्ट की संशोधित डीपीआर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की जाएगी। 9 अगस्त को प्रस्तावित जल क्रांति के लिए 75 हजार लोगों के साथ 75 हजार झंडे, 75 विधानसभा के लोगों व 75 किलोमीटर का विधानसभा के लिए पैदल कूच करने का ऐलान किया है। जिसमें प्रदेश के 13 जिलों सहित देश के कई राज्यों के लोग शामिल होंगे। ईआरसीपी के लिए हर घर जल क्रांति आंदोलन और जयपुर कूच का भी आयोजन रखा है, जिसमें 13 जिलों के हजारों लोग भाग लेंगे। आगंतुकों के लिए बैठने टेंट, 350 चांदनी, स्टेज बनाया जाएगा। हाईकोर्ट परिसर नांगल प्यारीवास मे एक लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था का टेंट लगाया जा रहा है ताकि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। यहां 75 वें अमृत महोत्सव के तहत मीणा हाईकोर्ट परिसर के टीटोली टोल प्लाजा से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक तिरंगे झंडों से सजाया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम सभी पार्टियों के सांसद, विधायक, प्रधान, जिला प्रमुख सहित अन्य जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों ने 8 और 9 अगस्त को होने वाली जनसभा में भीड़ जुटाने को लेकर गांव-ढाणियों तक दौरे शुरू कर दिए हैं। साथ ही कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर टीमें बनाई गई हैं जो युद्ध स्तर पर प्रचार-प्रसार में जुटी हैं। भाजपा सांसद डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने ईआरसीपी को लेकर 10 जुलाई को भी नांगल में सभा कराने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के व्यस्त कार्यक्रम के चलते सभा नहीं पाई थी।डॉ.किरोड़ीलाल मीना पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर काफी मुखर रहे हैं। इनका कहना है कि राज्य सरकार को संशोधित डीपीआर केंद्र को भेजना चाहिए। केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परिजना का दर्जा दिलवाने की जिम्मेदारी उसकी है।सांसद का आरोप है कि राज्य सरकार तकनीकी खामी दूर नहीं कर रही है। ईआरसीपी को लेकर डीपीआर केंद्र को भेजी गई थी। उसमें 50 प्रतिशत जल निर्भरता का प्रोजेक्ट बनाया था। राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाने के लिए 75 प्रतिशत जल निर्भरता आवश्यकता है। साथ ही चंबल का पानी मध्य प्रदेश से आता है। ऐसे में मध्य प्रदेश की सहमति भी आवश्यक है। इसके साथ ही दौसा सहित करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और जयपुर के सभी बड़े बांधों को इस परियोजना में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यदि यह तीनों तकनीकी खामी दूर करके पुनः प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दे तो इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करवाना उनकी गारंटी है।

0 टिप्पणियाँ