कोटा ब्यूरो रिपोर्ट।
सीबीएसई के शिव ज्योति एजुकेशनल ग्रुप के कॉन्वेंट स्कूल में बच्चों को पढ़ाई जा रही अंग्रेजी की दो किताबों पर विवाद हो गया है। स्कूल में कक्षा दो की अंग्रेजी की किताब के सेलेबस को लेकर हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जता दी है। विवाद के बाद स्कूल ने अपने सिलेबस से एक किताब को हटा दिया है। वहीं दूसरी किताब पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है। हिन्दू संगठनों का तो यह भी आरोप लगाया है कि देश की बाहरी ताकतें मोटा प्रलोभन देकर स्कूल और पब्लिकेशन मालिकों को ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि इस पूरे विवाद के बाद स्कूल ने अपने सिलेबस से एक किताब को हटा दिया है। दूसरी किताब पर अभी कोई जवाब नहीं दिया गया है। दरअसल जिन दो इंग्लिश की किताबों पर आपत्ति हुई है उनमें ओरियंट ब्लैकस्वान पब्लिकेशन हैदराबाद की किताब 'गुलमोहर लैंग्वेज फॉर लाइफ बुक' है। इसके अलावा दूसरी किताब वीवा पब्लिकेशन की 'एवरीडे इंग्लिश ग्रामर एंड कंपोजीशन' है। इस किताब में दिए गए पाठ्यक्रम के कुछ कंटेंट पर हिन्दू संगठनो ने विरोध जताया है। बजरंग दल के सह-प्रांत संयोजक योगेश रेनवाल का कहना है कि उन्होंने एक हेल्पलाइन शुरू की हुई है। इसपर अभिभावकों का फोन कर स्कूल में पढ़ाई जा रही किताबों के कंटेंट पर आपत्ति जताते हुए विरोध जताया था। शिव ज्योति कान्वेंट स्कूल में पढ़ाए जा रहे सिलेबस पर पैरंट्स की आपत्ति को हमने गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि ओरियंट ब्लैकस्वान पब्लिकेशन हैदराबाद की पुस्तकों के जरिए यह षड्यंत्र किया जा रहा है। ताकि छोटे बच्चों की मानसिकता दूषित किया जा सके। उन्होंने इस किताब को धर्मांतरण की ओर बढ़ते कदम से जोड़कर देखा है। पेरेंट्स ने भी आरोप लगाए हैं कि कई बच्चे घरों पर भी प्रकार के शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं जो कि हिंदू धर्म की आम बोलचाल में नहीं किए जाते हैं। साथ ही उन्होंने इस तरह की किताब पर भी आपत्ति जताई है। कुछ पेरेंट्स का तो यह भी कहना है कि अगर स्कूल प्रबंधन ने अपने फैसले में बदलाव नहीं किया है तब वे बच्चों का नाम स्कूल से कटवा देंगे। इस बात पर पैरंट्स ने स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई की मांग की है। स्कूल की प्रिंसिपल सीमा दीक्षित का कहना है कि स्कूल पूरी तरह से सेकुलर है। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी पढ़ते हैं। उन्होंने इस बुक को कभी इस कॉन्सेप्ट में भी नहीं लिया था। केवल अच्छी पब्लिकेशन की बुक है और कंटेंट काफी अच्छा है। इस कंटेंट को लोगों ने जिस नजरिए से देखा है वैसे हमने नहीं देखा था। अब इस तरह का मुद्दा उठाया गया है तब हम पूरी तरह से सोसायटी के साथ हैं। हमने इस बुक को सिलेबस से हटा दिया है। यह पब्लिकेशन 1948 से कितनी किताबें पब्लिश कर रहा है और पूरे देश भर में उसके कोर्सेज अच्छे स्कूलों में चलते हैं। हालांकि दूसरी बुक को सिलेबस से हटाने को लेकर प्रिंसिपल ने कोई जवाब नहीं दिया। उनका कहना है कि दूसरी बुक पर कोई आपत्ति नहीं आई है।

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