श्रीगंगानगर-राकेश मितवा।
हिंदी एवं राजस्थानी साहित्यकार डॉ. सत्यनारायण सोनी ने कहा है कि वे साहित्यकार होने से पहले अपनी भाषा के सिपाही हैं और इसके लिए वे अपना समय, ऊर्जा और सब कुछ करने को तत्पर रहते हैं। वह सृजन सेवा संस्थान की ओर से दी गंगानगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभागार में आयोजित मासिक कार्यक्रम ‘लेखक से मिलिए’ की छियानवीं कड़ी में अतिथि साहित्यकार के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा को भूलने का मतलब है, अपने पूर्वजों को भूलना, अपने संस्कारों को भूलना और अपने अतीत को भूलना। इसलिए व्यक्ति को अपनी भाषा से जुड़ाव सदैव बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. सोनी ने राजस्थानी भाषा की चर्चा करते हुए सरकार से आग्रह किया कि इसे स्कूलों में तृतीय भाषा के रूप में पढ़ाया जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी को भी एक विकल्प के रूप में रखा जाए। उन्होंने कार्यक्रम मेें जहां अपनी हिंदी कविताओं का वाचन किया, वहीं राजस्थानी कहानियां सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद बटोरी। उनकी कविताओं का अपना एक अलग ही अंदाज था। एक कविता ने विशेष ध्यान खींचा-उम्रभर लिखता रहा वह/प्रेम पत्र व प्रेम-कविताएं,/बेटी ने कलम उठाई तो/घर में बवाल हो गया।
डॉ. सोनी ने अपनी कहानियों से भी प्रभावित किया। उन्होंने कार्यक्रम में छोटी-छोटी कुल तीन कहानियां- घम्मसाण, माटी रो मोबाइल और ईमोजी सुनाई। घम्मसाण जहां पति-पत्नी के आपसी झगड़े को आधार बनाकर रची गई थी। वहीं माटी रो मोबाइल जूते पालिश करने वाले एक किशोर के श्रम और उसके अपनी दिवंगत मां से जुड़ाव को प्रकट करती थी। ईमोजी कहानी आज के युवाओं के मोबाइल प्रेम और उस पर समय नष्ट करने की प्रवृत्ति पर चोट करती है।
कार्यक्रम में डॉ. सोनी को सृजन साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक एवं पुस्तक भेंट करके सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक अनिलकुमार शाक्य ने विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं और डॉ. सोनी के साहित्य में दिए जा रहे योगदान की सराहना की।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी एवं आलोचक भूपेंद्रसिंह ने कहा कि डॉ. सोनी की रचनाएं आम आदमी के इर्दगिर्द घूमती हैं। पाठक को अपने साथ जोड़ लेती हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीवाइएसपी वेद लखोटिया ने भी संबोधित किया। इससे पहले सृजन के सचिव डॉ. कृष्णकुमार आशु ने डॉ. सोनी का परिचय दिया। संचालन डॉ. संदेश त्यागी ने किया। कार्यक्रम में कर्नल पंकजसिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी हरविंद्रसिंह, मनीराम सेतिया, बबीता काजल, मधु वर्मा, राजू गोस्वामी, रामकुमार भांभू, इजहार गंगानगरी, लक्ष्मीनारायण खाती, राजकुमार मिड्ढा, सुरेश कनवाडिय़ा, आनंद मायासुत, बनवारीलाल शर्मा, द्वारकाप्रसाद नागपाल, गौरीशंकर सहारण, राकेश मितवा, रमेश कुक्कड़, अरुण खामख्वाह एवं ललित चराया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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