जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
विगत कई वर्षों से राजस्थान राज्य में परित्यक्त बोरवेल / ट्यूबवेल में छोटे बच्चों के गिरने की में कई घटनायें घटित हुयी है। ऐसी घटनाओं में स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन द्वारा सूचना प्राप्त होने पर बोरवेल में फंसे हुए बच्चों को बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किये जाते है। इसमें स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अतिरिक्त अन्य संस्थाओं जैसे सिविल डिफेन्स, स्थानीय निकाय, चिकित्सा विभाग, स्थानीय स्वयंसेवक, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं सेना आदि को बुलाया जाता है। इस प्रकार की घटनाओं में बोरवेल से बच्चे को निकालने के लिए मौके पर मिट्टी खोदने व हटाने हेतु मानवीय श्रम के साथ-साथ कई प्रकार की मशीनरी, जेसीबी, टेक्ट्रर, डम्पर व पोकलेन आदि संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार के रेस्क्यू ऑपरेशन्स में बच्चे को जीवित अवस्था में निकालने हेतु कई घन्टों से लेकर कई दिनों तक की लम्बी अवधि भी लग जाती है। स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन तथा राज्य सरकार की ओर से भी इस प्रकार के रेस्क्यू ऑपरेशन्स में सर्वाधिक प्राथमिकता दी जाकर रेस्क्यू कार्य कराया जाता है जिसमें स्थानीय क्षेत्र की कानून व्यवस्था बनाये रखने के साथ-साथ अनावश्यक मानवीय श्रम, वित्त एवं संसाधनों का अपव्यय करना पड़ता है। प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं में बचाव एवं राहत कार्य हेतु गठित एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ के जवानों को इस प्रकार के अवसरों पर बिना रुके लम्बे समय तक अत्यधिक कठोर परिश्रम करना पड़ता है। ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन्स में कार्य कर रहे एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा सेना के जवानों पर बोरवेल में गिरे हुए बच्चे के परिजनों, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं पुलिस प्रशासन द्वारा भी बच्चे को जीवित एवं सकुशल अवस्था में जल्दी बाहर निकालने का दबाव भी रहता है और कई बार मौके पर कानून व्यवस्था की स्थिति भी खराब रहने की संभावना उत्पन्न हो जाती है। राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) राजस्थान, पुलिस मुख्यालय राजस्थान द्वारा जारी अनुदेशों के अन्तर्गत राज्य में प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं में सतत रूप से बचाव एवं राहत कार्यों हेतु क्रियाशील है। एसडीआरएफ राजस्थान द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में समय-समय पर जनजागरूकता अभियान आयोजित कर लोगों को प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं के समय बचाव एवं राहत कार्यों के बारे में सावचेत किया गया है। खुले एवं परित्यक्त ट्यूबवेल / बोरवेल अथवा खुले कुओं में इस प्रकार की गानवीय दुर्घटनाओं को रोकने हेतु इस कार्यालय द्वारा पुलिस मुख्यालय, शासन सचिवालय तथा समस्त जिला कलक्टर एवं समस्त पुलिस अधीक्षक को महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किये है। जिस पर राज्य के कुछ जिला कलक्टरस द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों को पालनार्थ निर्देश दिये गये है परन्तु अभी भी राज्य के कई स्थानों पर इस तरह की दुर्घटनाएं सामने आ रही है। छोटे बच्चों के परित्यक्त बोरवेल एवं ट्यूबवेल में गिरने से घातक दुर्घटनाओं से बचाव हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी रिट में भी दिशा निर्देश जारी किये गये है तथा उन दिशा निर्देशों की पालनार्थ पुनः रिट पिटीसन व अन्य सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में विचाराधीन है। चूँकि राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) राजस्थान राज्य में इस प्रकार की घटनाओं की सूचना मिलने पर प्रथमतः घटना स्थल पर पहुच कर कार्यवाही करता है। विगत दिनो जिला नागौर स्थित माधा की ढाणी में 2 वर्षीय बालक झुनझुन, पुलिस थाना साधौर जिला जालोर स्थित गाँव लाछडी में 4 वर्षीय बालक नराराम तथा पुलिस थाना खाटूश्यामजी जिला सीकर अन्तर्गत बिजारणियां की ढाणी गाँव चारणवास में 4 वर्षीय बालक गुड्डू को बोरवेल से जीवित एवं सकुशल रेस्क्यू कर बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। भविष्य में राज्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो तथा मानवीय श्रम एवं संसाधनों का अपव्यय न हो इस हेतु एसडीआरएफ राजस्थान द्वारा राज्य स्तर पर हैल्पलाईन की स्थापना की गयी है।

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