कोटा-हंसपाल यादव।
सारथल पुलिस थाने में पुलिसकर्मियों का नया अवतार देखने को मिला है दरअसल ढाई माह की मासूम बच्ची को भीषण गर्मी में भूख प्यास से तड़पती देख थानाधिकारी से लेकर थाने का हर एक जवान चिंतित हो उठा।मामले के जानकारी देते हुए थानाधिकारी महावीर किराड़ व एएसआई हरि शंकर नागर ने बताया कि ढाई माह की मासूम के लिए पुलिस थाने पर तैनात दोनों महिला कांस्टेबलों ने यशोदा माँ बनकर बारीबारी अपने आँचल का दूध पिलाकर मासूम बच्ची की जान बचाई। 
सारथल थानाधिकारी महावीर किराड़ ने बताया कि दिनांक 4 मई मंगलवार दोपहर एक सूचना प्राप्त हुई जिसमें एक शख्स जिसकी उम्र 30 के लगभग की है जो नशे की हालत में थाना इलाके के बाबड़ के पहाड़ी जंगली क्षेत्र से पैदल गुजर रहा है। जिसके पास एक बच्ची है । सूचना पर डीओ हरिशंकर नागर मय जाप्ते के कानि. सुजान सिंह 386, कानि. अरविंद 126,कानि. रामनिवास 504, महिला कानि. मुकलेश 1280  सूचना के आधार पर बाबड़ के जंगल में तलाश के लिए रवाना हुऐ। जँहा बाबड़ क्षेत्र के जंगल मे झाड़ियों में घुसा हुआ व्यक्ति मिला जिसकी तस्दीक करने पर व्यक्ति वहीँ पाया गया। जिसके पास गर्मी से बेहाल अचेत अवस्था मे उसके पास एक ढाई माह की बालिका मिली। जिसे तुरंत महिला कांस्टेबल मुकलेश ने सीने से चिपका लिया। 
नशे में धुत व्यक्ति को बच्ची सहित थाना लाया गया जँहा बच्ची की नाजुक हालत देखते हुऐ महिला कांस्टेबल मुकलेश व पूजा जिनके सालभर के बच्चें है। उन्होंने बारीबारी अपने आँचल का दूध पिलाकर मासूम बच्ची की भूख मिटाई वहीँ नशेड़ी व्यक्ति से पूछताछ पर पाया गया कि ढाई माह की बच्ची का पिता है। जिसका नाम राधेश्याम काथोड़ी निवासी सालापूरा थाना छीपाबडौद होना ज्ञात हुआ। जो अपने सुसराल गाँव बंधा थाना कामखेड़ा जिला झालावाड़ से अल सुबह 4 से 5 बजे के लगभग उसकी बच्ची को लेकर चुपचाप पैदल रवाना हो गया । जिसने पैदल भूखी प्यासी बच्ची के साथ नशे की हालत में पन्द्रह किलोमीटर पैदल चलकर सालापुरा जा रहा था। 
उक्त मामले को लेकर बच्ची की माँ को सूचना पहुँचा दी गई है जबतक बच्ची की देखरख कानि.मुकलेश व पूजा की निगरानी में रखी गई। जँहा दोनों बारीबारी बच्ची को स्तन पान कराती रही । महिला कांस्टेबल मुकलेश व पूजा ने बताया की बच्ची की हालत देखकर लगा कि काफ़ी घण्टों से भूखी है। होठ सूखे हुऐ थे इतनी छोटी बच्ची को ऊपर का कुछ नही दे सकते। हम दोनों के एक साल के बच्चे है। इसलिये बिना देर किये हुए पहले पूजा ने फिर मुकलेश ने बच्ची को स्तनपान करवाया । ईश्वर की यही गरिमा थी कि एक अनजान आदिवासी बच्ची ने हमारा दूध पिया है ।