करौली ब्यूरो रिपोर्ट।
जिला कलक्टर अंकित कुमार सिंह ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी जिला जन अभियोग एवं सतर्कता समिति में दर्ज प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुये दर्ज प्रकरणों का शीघ्रता से निस्तारण कर परिवादियों को लाभान्वित करावे। उन्होंने समिति में कुल दर्ज 35 प्रकरणों में सुनवाई करते हुए 14 प्रकरणों का निस्ताण किया गया। शुक्रवार को कलेक्टेट स्थित भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्र में आयोजित जिला जन अभियोग व सतर्कता समिति की बैठक की समीक्षा करते हुए जिला कलेक्टर ने यह निर्देश दिये। उन्होंने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त प्रकरण, मानवाधिकार आयोग से प्राप्त प्रकरण सहित सतर्कता समिति मे दर्ज प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण करते हुए समय पर रिपोर्ट भिजवाना सुनिश्चित करें, जिससे परिवादी को समय पर राहत मिल सके। उन्होने कहा कि परिवादियों की समस्याओं का निस्तारण ग्राम पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर ही आसानी से हो जिससे कि उन्हे जिला स्तर पर बिना वजह चक्कर नहीं लगाने पड़े। इसके साथ ही उन्होने समस्त जिला स्तरीय अधिकारी एवं उपखंड अधिकारियों को हिदायत दी कि वे आमजन से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में अविलम्ब और प्राथमिकता के साथ कार्यवाही करें तथा उनके निस्तारण के संबंध में की गयी कार्यवाही की सूचना को शीघ्रता से भिजवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर परसराम मीना, मुख्य कार्यकारी अधिकारी महावीर प्रसाद नायक, जीएम डीआईसी के.के मीना, विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता आरसी शर्मा, एसीपी विनोद मीना, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धर्मेन्द्र मीना सहित कृषि सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जिला कलक्टर अंकित कुमार सिंह ने बैठक के उपरांत जनसुनवाई भी की,जनसुनवाई के दौरान परिवादियों द्वारा राजस्व, पुलिस, सिलिकोसिस मुआवजा, अतिक्रमण, खातेदारी सहित अन्य प्रकरण दर्ज किये गये।जिला कलेक्टर ने प्रकरणों को शीघ्र निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।उन्होने वीसी के माध्यम से समस्त उपखंड अधिकारी व ब्लॉक सीएमएचओं को कोविड टीकाकरण की शत प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त करने एवं गर्मी के मौसम व विद्युुत कटौती को देखते हुए विद्युत विभाग एवं पेयजल विभाग, जिला ब्लॉक व ग्राम पंचायत स्तर पर समन्वयता के साथ कार्य करने के लिये निर्देशित किया जिससे कि आमजन को पेयजल की समस्या का सामना नहीं करना पड़े।

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