उदयपुर-भगवान प्रजापत।
कोरोना हेल्थ वर्कर्स ने गुरूवार को जिला मुख्यालय पर विशाल रैली निकालकर कलेक्ट्री के बाहर गहलोत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल 31 मार्च कोरोना हैल्थ वर्कर्स को अचानक कार्य मुक्त कर दिया। इससे हजारों वर्कर्स के लिए रोजी रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया। कार्य मुक्त करने के बाद पिछले 35 दिनों से जयपुर में वर्कर्स का प्रदर्शन चल रहा था लेकिन उदयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर के तय होने के बाद अब कोरोना हैल्थ वर्कर्स यहां पर डेरा डाल दिया है। गुरूवार को विशाल रैली निकालने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ नारेबाजी की गई। कोरोना हैल्थ वर्कर्स ने प्रदर्शन के बाद बताया कि महामारी के दौरान दूसरी लहर में काम पर रखा गया लेकिन सरकार ने अचानक 31 मार्च को एक साथ हजारों कोरोना हैल्थ वर्कर्स को कार्य मुक्त कर दिया गया। इससे रोजी रोटी के साथ मान सम्मान पर ठेस पहुंची है। कोरोना वॉरियर्स के साथ ही सरकार इस तरह का व्यवहार करेगी यह किसी ने सोचा नहीं था। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि मुसीबत की घडी मे जब माता पिता के पास बेटा जाने को तैयार नहीं था साथ ही भाई ने भाई से दूरी बना ली थी। उस दौरान भी कोरोना हैल्थ वर्कर्स ने पूरी ईमानदारी से काम करते हुए हजारो लोगो की जान बचाई। सरकार ने सभी को बीच मझदार में छोड दिया इससे सभी को ठोकरें खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कोरोना हैल्थ वर्कर्स ने स्पष्ट तौर पर सरकार से मांग की है कि उनको पूर्व की तरह नियुक्ति दी जाए साथ ही चिकित्सा विभाग से सैलेरी दी जाए। कोरोना हैल्थ वर्कर्स सभी डिग्रीधारी है ऐसे में पूर्ण सुविधा प्रदान की जाए।
प्रदेश के 28 हजार कोरोना हैल्थ वर्कर्स को किया था कार्य मुक्त।
दरअसल गहलोत सरकार ने एक आदेश जारी कर प्रदेश के 28 हजार कोरोना हैल्थ वर्कर्स को 31 मार्च को कार्य मुक्त कर दिया था। इससे आक्रोश व्याप्त हो गया। इससे एक साथ हजारो युवा सड़क पर आ गए और उनकी रोजी रोटी छिन गई। ऐसे में इनको मजबूरन धरने पर जाना पड़ा। जयपुर में 4 कोरोना हैल्थ वर्कर्स आमरण अनशन पर बैठे है फिर भी न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

0 टिप्पणियाँ