प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से। 

गहलोत सरकार में मंत्री और सीएम के नजदीकी माने जाने वाले डॉ. सुभाष गर्ग ने आज एक ट्वीट किया जिसमें मोटे तौर पर उन्होने लिखा कि कांग्रेस को किसी सलाहकार और सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि नेतृत्व को चाणक्य की जरूरत है न कि व्यापारी की। 

डॉ.सुभाष गर्ग ने मंगलवार को सुबह ट्वीट किया- किसी संगठन को मज़बूत व ताकतवर केवल नेतृत्व और कार्यकर्ता ही बना सकते हैं। अपने ट्वीट में गर्ग ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन यह स्पष्ट था कि वे प्रशांत किशोर उर्फ पीके पर निशाना साध रहे थे। 

सवाल यह उठता है कि सुभाष गर्ग के पेट में कांग्रेस की आरूणि गतिविधि को लेकर इतना दर्द क्यों उठा क्योंकि वे तो कांग्रेस के विधायक या प्राथमिक सदस्य भी नहीं हैं।  वे राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर विधायक बने हैं। ग्रह का यह बयान आने के बाद तुरंत राजनीतिक गालियॉं में चर्चा का दौर शुरू हो गया।  लोगों ने अलग-अलग कयास लगाने शुरू कर दिए।

याद रहे पीके पर यह राजस्था से दूसरी टिप्पणी है।  पहली टिप्पणी खुद सीएम गहलोत ने की थी।  उन्होने कहा था कि यह कोई पहली बार नहीं है कि कांग्रेस किसी विशेषज्ञ से राय मशविरा कर रही हो इसीलिए इसमें ज्यादा कुछ देखने की जरुरत नहीं है। अब दूसरी टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की आई है को कि कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी अनुशासन से बंधा हुआ नहीं है। राजस्थान की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि सुभाष गर्ग का राजनीतिक कद प्रदेश में ही इतना बड़ा नहीं है कि वे प्रदेश नेतृत्व पर ही कोई टिप्पणी करें और उसे गंभीरता से लिया जाए।  

मतलब साफ़ है तोते से बुलवाया गया। चिंतन शिविर से पहले, उस चिंतन शिविर से पहले जिसकी मेजबानी ही राजस्थान को करनी है , गर्ग ने जिन सधे हुए शब्दों में ट्वीट किया गया वे किसी राजनीति में माहिर खिलाड़ी के लगते हैं, ग्रहग के तो कतई नहीं। 

ट्वीट की टाइमिंग उन लोगों को महत्वपूर्ण लगेगी जिनको कांग्रेस के अंदर चल रहे घटनाक्रम का पता हो।  असल में सोनवार को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने पार्टी के सामने आए पुनर्निर्माण प्रस्तावों तथा 2024 की चुनौतियों पर मंथन करने के लिए एक एम्पॉवर्ड कमेटी का गठन किया था।  यह कमिटी अन्य बातों के अलावा प्रशांत किशोर के प्रेजेंटेशन पर भी चर्चा करती।  बस यहीं से जयपुर-दिल्ली, हरियाणा-दिल्ली, रायपुर-दिल्ली के बीच फोन किए जाने लगे। इन टेलीफोन वार्तालापों का मुख्य विषय था कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा बनाई गई एम्पॉवर्ड कमिटी में प्रशांत किशोर को भी सदस्य बनाया गया है।  

जवाब में सुबह-सुबह गर्ग का ट्ववीट बाण सामने आया. अब यह तो तय है की डॉ. गर्ग को कांग्रेस के अंदरूनी घमासान की इतनी अंदर की खबर यूँही नहीं मिल गई होगी।  मतलब तोते से बुलवाया गया। 

मंगलवार शाम होते-होते यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस और पीके का गठजोड़ नहीं बन पायेगा और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान जारी किया जिसमे पीके को एम्पॉवर्ड कमिटी का न्योता दिए जाने और पीके द्वारा उसे थिकता दिए जाने की बात कही गई।  कांग्रेस ने प्रशांत किशोर के प्रेजेंटेशन और उनके सुझावों के लिए इनका शुक्रिया भी कहा।  यानी जय राम जी की।  

पीके की स्टोरी का कांग्रेस में द एंड इतना जल्दी होने में राहुल गाँधी की भूमिका बेहद खास रही।  उन्होने पूरी कसरत से खुद को अलग कर के अपना सन्देश सबसे पहले दिया था।  'चाणक्य' इसे समझ गए और उन्हौने अपना बयान बाण चला दिया।  रही सही कसर आज गर्ग साहब ने पूरी कर दी। उनका ट्ववीट ध्यान से पढ़ियेगा।  आप समझ जायेंगे कि वे किसे व्यापारी, सलाहकार आदि कह रहे हैं।  गर्ग ने अपने ट्वीट में चाणक्य शब्द का भी इस्तेमाल किया।  अब राजस्थान में आज की तारीख में कांग्रेस का चाणक्य कौन है, यह तो सभी जानते हैं। 

चलते चलते कलीम आजिज़ का एक शेर पेश है -

दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग। 

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो।