जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

राज्य सरकार अब सभी 28 सरकारी यूनिवर्सिटीज से राज्यपाल की भूमिका खत्म करने की तैयारी में है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों के लिए अम्ब्रेला एक्ट लाया जा रहा है। इसमें कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से नामित शिक्षाविद् की भूमिका होगी। राज्यपाल उसी तरह विजिटर होंगे, जैसे केंद्रीय विवि में राष्ट्रपति होते हैं।

विजिटर काे केवल दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया जाता है। सभी विश्वविद्यालयों के लिए यह एक्ट कॉमन होगा। अभी सबके अलग-अलग एक्ट हैं। अम्ब्रेला एक्ट के लिए नौ सदस्यों की कमेटी ने नए एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया है। ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई कमेटी के चेयरमैन जेएनवीयू के पूर्व वीसी प्राे. पीसी त्रिवेदी हैं।

इनके अलावा अलवर विवि के वीसी प्राे. जेपी यादव, स्किल विवि में डायरेक्टर प्राे. एके नागावत और पर्सनल, फाइनेंस, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। प्रो. त्रिवेदी के अनुसार, अम्ब्रेला एक्ट के लिए रिपोर्ट सरकार काे दे दी। इधर, विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के बाद यूनिवर्सिटीज में राजनीतिक नियुक्तियों के रास्ते खुलेंगे।

कमेटी ने ड्राफ्ट तैयार करने के लिए देशभर के कई विश्वविद्यालयों के एक्ट की स्टडी की है। इनमें महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटी एक्ट 2016, आंध्रप्रदेश यूनि. एक्ट 1991, केरल यूनि. एक्ट 1974 एंड द यूनिवर्सिटी लाॅ (अमेंडमेंट) बिल 2021, द वेस्ट बंगाल स्टेट यूनि. एक्ट 2007, द एमपी विवि अधिनियम 1973, द सेंट्रल यूनि एक्ट 2009, यूनि. ऑफ राजस्थान, जेएनवीयू के अलावा यूजीसी रेगूलेशंस की स्टडी की गई।

ऐसा एक्ट लाने वाला राजस्थान तीसरा राज्य होगा, राज्यपाल सिर्फ विजिटर की भूमिका में होंगे

क्या इस तरह का एक्ट लाने वाला राजस्थान पहला राज्य होगा?
नहीं, तेलंगाना, बिहार में ऐसा पहले से, पश्चिम बंगाल में भी तैयारी तेलंगाना सरकार भी 2015 में ऐसा एक्ट ला चुकी है। इसके तहत हर विवि का चांसलर राज्य सरकार नियुक्त करती है। बिहार में 3 विवि में सीएम काे चांसलर बनाया गया है। यह बदलाव 2021 में किया गया। बंगाल में भी चांसलर सीएम काे बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

एक्ट की जरूरत क्याें?
ड्राफ्ट के अनुसार सभी यूनिवर्सिटी के एक्ट में भिन्नताएं हैं। सरकार के निर्देेश सही तरह से लागू नहीं हाे पाते। उच्च शिक्षा विभाग काॅर्डिनेट नहीं कर पाता। गवर्निंग बॉडीज अलग हैं, जैसे सिंडिकेट, सीनेट, एकेडमिक काैंसिल। काॅमन एक्ट इसलिए लाना चाहते हैं ताकि अलग-अलग ऑर्डिनेंस, रेगूलेशंस में समानता लाई जा सके। काॅमन एक्ट के जरिए ज्यादातर चीजाें काे जाेड़ दिया जाए। काेई भी विवि अलग अलग निर्णय नहीं ले सकें।

इससे फायदा क्या होगा?
सरकार का मानना है कि इससे विवि में पॉलिसी लागू करना सरल हाे जाएगा। एक्ट एक हाेगा ताे सभी विश्वविद्यालयों के बीच सामंजस्य भी बेहतर हाेगा। नई शिक्षा नीति समान रूप से सभी जगह लागू हाे पाएगी। यूनिवर्सिटी की परफाॅर्मेंस के आधार पर कई चीजें निर्धारित हाे सकेंगी। अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। यूजीसी रेगूलेशंस अच्छे से लागू हाे सकेंगे।

एक्ट की अहम बातें

65 से 75 साल के शिक्षाविद् भी बन सकेंगे चांसलर
काॅमन एक्ट के लिए बने ड्राफ्ट के अनुसार वाॅइस चांसलर के अलावा प्राे चांसलर और इनके ऊपर चांसलर हाे सकता है। मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से नामित व्यक्ति चांसलर हाे सकता है। चांसलर की नियुक्ति मुख्यमंत्री कर सकेंगे। चांसलर 65 से 75 साल के शिक्षाविद भी हाे सकेंगे। तीन विश्वविद्यालयों पर एक चांसलर लगाया जा सकता है। हालांकि इस बात का निर्णय अभी उच्च स्तर पर हाेगा।

शिक्षा मंत्री काे प्राे. चांसलर बनाया जा सकता है

  • चांसलर की भूमिका सीमित होगी। बैठकों के बारे में निर्देश देना। सरकार से काेई मामला आता है तो प्राे चांसलर की मदद से यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांग सकेंगे।
  • वाॅइस चांसलर की नियुक्ति सरकार की संस्तुति पर चांसलर ही करेगा।

विवि की गवर्निंग बाॅडी में सांसद, पद्म अवार्डी जाेड़े जाएं

  • ड्राफ्ट के अनुसार विश्वविद्यालयों की गवर्निंग बाॅडी जैसे सीनेट, सिंडिकेट व अन्य में कॉर्पोरेट हाउस से दाे लाेग, दाे पद्म अवार्डी, 1 लोकसभा का सदस्य, 5 एलुमिनाई सदस्य जोड़े जा सकेंगे।
  • सिंडिकेट में अभी सरकार, राजभवन भी सदस्यों की नियुक्ति करते हैं। नए ड्राफ्ट के अनुसार वाॅइस चांसलर काे इन नियुक्तियों के अधिकार ज्यादा हाेंगे।
  • उच्च शिक्षा विभाग के जॉइंट सेक्रेट्री स्तर के अधिकारी किसी भी काॅलेज का इंस्पेक्शन कर सकेंगे।

एक्ट लाने की वजह- कुलपतियाें के साथ विवाद
प्रदेश में करीब 14 कुलपति बाहरी राज्यों के हैं। सर्वाधिक 9 यूपी के हैं। हाल ही सुखाड़िया के वीसी अमेरिका सिंह के खिलाफ भी एक निजी विवि का वैरिफिकेशन करने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। कई वीसी की प्रोफेसर हाेने के अनुभव पर भी सवाल उठे हैं। माना जा रहा है कि इसलिए भी यह एक्ट लाया जा रहा है।