आज कल खून की जांचों के पैकेज में एक जांच होती है जिसे होमोसिस्टिन कहते हैं। रक्त में इसके स्तर को लेकर काफी भय और भ्रम देखा गया है। हर जांच का पूर्ण विश्लेषण करके ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता था वरना आधा अधूरा ज्ञान कष्ट का कारण बन जाता है। होमोसिस्टिन एक तरह का अमीनो एसिड होता है जिसे हमारा शरीर खुद पैदा करता है और अनुपयोगी मात्रा को नष्ट भी कर देता है। चूंकि शरीर इसको बहुत शीघ्रता से नष्ट करता है तो सामान्यतया इसके रक्त स्तर नीचे ही पाए जाते हैं। यदि स्तर सामान्य से अधिक हों तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। ज्यादातर लोगों में किसी विटामिन की कमी की वजह से होमोसिस्टिन नष्ट नहीं किया जा सकता है जिसकी वजह से इसका रक्त स्तर बढ़ जाता है। इस तरह से हम देखते हैं कि घबराने की बजाय हमें यह जानना चाहिए कि हमारे शरीर में किस विटामिन की कमी हो गई है।

चूंकि भारत की बड़ी आबादी शाकाहारी है तो उनमें विटामिन बी 12 की कमी रहती है। इसके अलावा बी 6 तथा फोलेट की कमी से भी होमोसिस्टिन का स्तर बढ़ जाता है क्योंकि इसे नष्ट करने के लिए शरीर को ये सब विटामिन चाहिए होते हैं। इन सब विटामिन की कमी से कमजोरी, आलस्य, थकान, मांसपेशियों में दर्द, मुख में छाले, त्वचा का पीलापन, चक्कर आना और पैरों में चुभन जैसा होना आदि हो सकते हैं। ध्यान रहे ये सब लक्षण होमोसिस्टिन बढ़ने से नहीं बल्कि विटामिन की कमी से होते हैं। इसलिए भयभीत होने की बजाय जागरूक हो कर इनकी कमी की पूर्ति करनी चाहिए। इन विटामिन की कमी शुद्ध शाकाहारी, मोटापा कम करने के प्रयास, कुछ बीमारियों और कई दवाओं के सेवन से भी हो जाती हैं। डायबिटीज, गठिया, हाइपोथायरॉयड, एसिडिटी आदि रोगों के इलाज में काम आने वाली कई दवाएं भी इन विटामिन की शरीर में कमी कर सकती हैं इसलिए इनके रोगियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति का होमोसिस्टिन लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहता है तो उस व्यक्ति में हृदय संबंधी रोग बढ़ सकते हैं पर सामान्य स्तर हृदय रोग की संभावनाओं को कम भी नहीं करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि स्वस्थ रहने के लिए हमें हमारे भोजन को संतुलित बनाना होगा। आखिर में एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब रक्त की जांच करवाएं तो 8 से 12 घंटे भूखा रहना चाहिए हालांकि पानी पी सकते हैं और दूसरे जांच से एक दिन पहने कोई विटामिन की गोली न लें।