जोधपुर ब्यूरो रिपोर्ट।

नगर निगम ने वर्ष 2011 से 2016 तक संविदा और ठेका कर्मचारियों के पीएफ खाते में पैसा जमा ही नहीं कराया। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (पीएफ) ने निगम को 15 दिनों में 32 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश दिया है। निगम निश्चित अवधि में पैसा जमा नहीं करवाता है तो पीएफ कार्यालय की ओर से निगम के बैंक खाते सीज कर वसूली की जाएगी। गंभीर बात यह है कि निगम के अफसरों को इसकी जानकारी ही नहीं है।

इसे लेकर आयुक्त दक्षिण का कहना है कि वे मामले का पता करवाकर उचित निर्णय लेंगे। पीएफ ने वर्ष 2011 से 2016 तक का एसेसमेंट निकाला है। इसमें पता चला कि तत्कालीन समय में निगम में काम करने वाले ठेका कर्मचारियों के खाते में पीएफ राशि जमा ही नहीं हुई, जबकि ठेकाकर्मी और निगम/ठेका फर्म को 12-12 प्रतिशत राशि पीएफ में जमा करवानी थी। किसी ने भी कर्मचारियों के खाते में पीएफ राशि जमा नहीं कराई।

इस अवधि की एक दल ने जांच कर 32 करोड़ से अधिक राशि का एसेसमेंट निकाला है, जिसे 15 दिनों में जमा करवाना है। हालांकि निगम इस निर्धारण आदेश के विरुद्ध जयपुर स्थित इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में 60 दिन के भीतर अपील कर सकता है। ऐसे में अगर 60 दिनों में यह राशि जमा नहीं हुई तो निगम के खाते सीज कर वसूली की जाएगी।

पीएफ कार्यालय की ओर से निगम से 2012 से ही पत्र व्यवहार किया जा रहा है, जिसमें 8 जनवरी 2011 के नोटिफिकेशन का हवाला देकर निगम को पीएफ कवरेज देने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन निगम की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। पीएफ की ओर से मामले को लेकर 60 से ज्यादा बार सुनवाई की गई, पर अधिकांश सुनवाई में निगम की ओर कोई नहीं पहुंचा। गत 13 अप्रैल को पीएफ ने 32 करोड़ का एसेसमेंट ऑर्डर निकाला है, जो 2011 से 2016 यानी 5 साल का है। इसके बाद के वर्षों से अब तक जांच की जाए तो यह आंकड़ा और बढ़ेगा।

पांच साल की अवधि के दो एसेसमेंट निकाले
निगम में वर्ष 2011 से 2016 तक ऐसी फर्में शामिल थीं, जिन्होंने संविदा व ठेका कर्मचारी लगाए थे। ठेका फर्म और नगर निगम की ओर से इनका पीएफ जमा नहीं कराया गया। पीएफ की ओर से दो एसेसमेंट निकाले गए। पहला जनवरी 2011 से मार्च 2016 और दूसरा अप्रैल 2016 से अगस्त 2016 तक का। इसमें 2011 से 2016 तक 30 करोड़ 17 लाख 29311 रुपए और अप्रैल 16 से अगस्त 16 तक 2 करोड़ 78 लाख 74321 रुपए का एसेसमेंट निकाला गया।

चार माह में निगम पर दो बार लग चुका जुर्माना
पिछले चार माह में एनजीटी के निर्देश पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से जोधपुर में समय पर एसटीपी और सीईटीपी का निर्माण कार्य पूरा नहीं करने पर नगर निगम पर करीब ढाई करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद एनजीटी ने सुनवाई करते हुए सीवरेज का पानी नाले में जाने पर जुर्माना लगाया था, जो करीब 2 करोड़ का था। अब पीएफ का एसेसमेंट 32 करोड़ का निकाला गया है।