श्रीगंगानगर - राकेश मितवा
पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री एवं श्रीगंगानगर सांसद निहालचंद ने बंदी काल के समय भी पंजाब द्वारा राजस्थान को आने वाले दूषित पानी के मुदृदे पर अपना पक्ष रखते हुए, इसके लिए पंजाब की सभी सरकारों को जिम्मेदार बताया है।
उन्होने कहा कि श्रीगंगानगर व हनुमानगढ समेत राजस्थान के लगभग 12 जिलें पंजाब से आने वाले इस दूषित जल से प्रभावित है और इन जिलों के लोग पिछले लम्बे समय से इस दूषित पानी की मार झेल रहे है। केमिकल युक्त इस गंदे पानी से इन क्षेत्रों में कैंसर, पीलिया, चर्म आदि रोगों में तेजी से बढोतरी हो रही है। डॉक्टरों व विषेषज्ञों के द्वारा इस दूषित पानी के निरन्तर सेवन से किडनी फेल और गर्भपात जैसी गंभीर समस्या का सामाना करना पड रहा है।
उन्होने बताया कि अभी हाल में सम्पन्न विधानसभा से पहले पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और राजस्थान प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार है, लेकिन बावजूद इसके दोनो सरकारों ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई भी ठोस कार्यवाही नही की।
केन्द्र सरकार द्वारा पंजाब में राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अधीन व्यास व सजलुज नदियों में प्रदूषण उन्मूलन करने हेतु 663.20 एम.एल.डी. की कुल क्षमता वाली 26 सीवरेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का निर्माण करने के लिए वर्ष 2021-22 में लगभग 774.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसके तहत 516.14 करोड़ रूपयें की राशि भी दी जा चुकी है, बावजूद इसके पंजाब सरकार नदियों में प्रदुषण रोकने में पूरी तरह विफल रही है।
इसके साथ ही राजस्थान प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी दूषित पानी के इस मुदृदे को पंजाब सरकार के साथ गंभीरतापूर्वक हल करवाने में असमर्थ साबित हो रही है। राजस्थान प्रदेश में पानी की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, दूषित पानी का मुदृदा बहुत ही बड़ा है और सभी को राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द इसके स्थायी समाधान का रास्ता ढूंढने जरूरत है।
सांसद श्री निहालचंद ने इस मुद्दे को पूर्व में भी कई बार लोकसभा, पंजाब के राज्यपाल, लोकसभा की जल संसाधन समिति की बैठकों समेत जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उच्च अधिकारियों के सामने रखा है। केन्द्र सरकार व केन्द्रीय नियंत्रण बोर्ड ने भी कई बार पंजाब सरकार को इस दिशा में शीघ्र ठोस व सकारात्मक कदम उठाने के लिए निर्देशित भी किया है, साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) ने प्रदूषित पानी के लिए पंजाब सरकार पर 50 करोड़ रूपये का जुर्माना भी लगाया था और साथ ही पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी बुड्ढा नाला के नजदीक बनने वाले 50 एम.एल.डी. की क्षमता के सी.ई.टी.पी. के निर्माण में देरी के लिए भी 1.27 करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया था, जो कि पंजाब की औद्योगिक ईकाईयों से वसूला जाना था। इतनी घटनाओं के बावजूद भी पंजाब की सरकार इस विषय में गंभीर दिखाई नही देती। मेरा राजस्थान और पंजाब की प्रदेश सरकारों से आग्रह है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, इसके उचित निस्तारण के लिए ठोस कदम उठायें, क्यूंकि केन्द्र सरकार इस मुद्दे पर अपनी ओर से सक्षमक कार्यवाही कर रही है।

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