श्रीगंगानगर - राकेश मितवा
श्रीगंगानगर के प्राचीन शिवालय शुक्र नाथ की बगीची में 4 साल बाद अति रुद्र महायज्ञ का आयोजन कल रविवार से होगा. 11 कुंडीय इस महायज्ञ में काशी के विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान पूर्वक मंत्रोचार सहित इस यज्ञ का आयोजन किया जाएगा ।
यज्ञ में ब्रम्हा के पद पर आसीन पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि भगवान शिव यजुर्वेद मय है और वेद के पाठ की विधि के अंतर्गत यजुर्वेद रुद्राष्टाध्याई पाठ 6 अंगों के सहित करने से वह पाठ षडंग रुद्राष्टाध्याई पाठ कहा जाता है। इसके उपरांत इस रुद्राष्टाध्याई के पांचवें अध्याय के 11 पाठ होने पर एक रुद्र होता है और इन 11 पाठों का एक लघु रुद्र कहा गया है एक लघु रूद्र को 120 बार पाठ करने से महारुद्र होता है और महारुद्र से फिर और अधिक पाठ करने पर अतिरुद्र यज्ञ होता है।
इसके करने से धन-धान्य संपदा संतान सुख की प्राप्ति कामना वृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए सभी मनोवांछित फलों की प्राप्ति के लिए और भी अन्य जो मनोकामनाएं हैं इस अनुष्ठान यज्ञ से अधिक फल की प्राप्ति होती है।
यज्ञ के आचार्य पंडित विजेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस रुद्र महायज्ञ में पंचांग पूजन के साथ यज्ञ की शुरुआत होगी इसके बाद विभिन्न प्रकरणों से गुजरते हुए कलश यात्रा निकाली जाएगी शाम को 3:00 बजे अरणी मंथन के साथ अग्नि का प्राकृतिक किया जाएगा इसके साथ ही रुद्र महायज्ञ का आयोजन शुरू हो जाएगा जो कि अगले 11 दिन तक पूरे विधि विधान के साथ लगातार चलेगा यज्ञ में काशी से विद्वान पंडित एवं आसपास के भी अनेक वितरण यहां पर आएंगे लगभग 101 ब्राह्मणों के द्वारा यह यज्ञ का पुनीत कार्य संपादित किया जाएगा जो कि विश्व शांति तथा विश्व कल्याण के लिए होगा।
प्राचीन शिवालय के महंत बाबा कैलाश नाथ ने बताया कि अति रूद्र महायज्ञ के दौरान बाहर से आए हुए सभी ब्राह्मणों के रहने की विशेष व्यवस्था की गई है । वैदिक गुरुकुल पद्धति के अनुसार घास के सरकंडा से तैयार वातानुकूलित झोपड़ियों का निर्माण किया गया है। जिनमे ब्राह्मण निवास करेंगे। अति रुद्र महायज्ञ में शरीक होने के लिए देशभर के विभिन्न मतों से साधु संत और महंत भी पधार रहे हैं।

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