जालोर ब्यूरो रिपोर्ट।
कृषि विभाग द्वारा जिले में नहरी व गैर नहरी क्षेत्र में राज्य वृक्ष खेजड़ी पर लगे गेनोडर्मा कवक से हो रहे नुकसान की समस्या के समाधान के उपाय बताये गये हैं। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. आर.बी.सिंह ने बताया कि जिले में नहरी व गैर नहरी क्षेत्र में राज्य वृक्ष खेजड़ी पर रोग लगने से नष्ट होने के संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर कृषि विभाग द्वारा केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) से संपर्क किया गया। काजरी द्वारा खेजड़ी वृक्ष के सूखने का कारण गेनोडर्मा नामक कवक को माना है। जब खेजड़ी के पेड़ में पानी की कमी अथवा किन्हीं ओर कारणों से वृक्ष कमजोर पड़ जाता है तब भूमि जनित कवक गेनोडर्मा वृक्ष की जड़ों को संक्रमित करके पेड़ को पानी के परिवहन में बाधा उत्पन्न करता है जिससे पौधें सूखने लगते हैं।

किसान ऐसे बचाये वृक्ष को।
उप निदेशक ने गेनोडर्मा कवक से खेजड़ी के बचाव के लिए उपायों की जानकारी देते हुए बताया कि खेजड़ी वृक्ष के निचले हिस्से पर चारो तरफ 1 से 1.5 फीट गड्ढा खोदे अथवा थाला बनावें। उजागर हुई तीन थली जड़ों के ऊपर क्लोरोपाईरीफॉस (20मिली) को 20 लीटर पानी में घोलकर डाले फिर जड़ों को मिट्टी की पतली परत से ढ़क दें। ट्राईकोडर्मा हारजेनियम (मित्र फफूंद) 250 ग्राम को 2 किलो विलायती बबूल की कम्पोस्ट खाद के साथ मिलाकर खेजड़ी की जड़ों में डाले। मित्र फफूंद ट्राईकोडर्मा लोगीब्रकेटम (250ग्राम) को 5 किलो मिगनी की खाद में मिलाकर गड्ढे में डाले।एर्स्पजिलस निड्डलेंस 250 ग्राम एवं 2 किग्रा प्याज का कचरा मिलाकर गड्ढों को भरा जावें तथा खोदे हुए गड्ढे को मिट्टी से भर दें व तकरीबन 200 लीटर पानी से सिंचित करें। तीन माह पश्चात् यह तकनीक फिर से अपनावें। इससे खेजड़ी वृक्ष के सूखने की वजह का काफी हद तक निवारण हो जायेगा।