जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान मे 25 और 26 फरवरी को आयोजित होने वाली आरएएस की मुख्य परीक्षा को लेकर बवाल जारी है। जहां आरएएस परीक्षा की तिथि को बढ़ाने के लिए युवा आंदोलन कर रहे हैं। वहीं युवाओं की मांग को देखते हुए राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित भाजपा नेता भी परीक्षा तिथि को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं को कांग्रेस के विधायक का भी साथ मिला है।
 मुख्यमंत्री के सलाहकार एव विधायक संयम लोढ़ा ने RAS मुख्य परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाने की मांग का ट्वीट कर अपनी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग की है। वही पायलट समर्थक माने जाने वाले चाकसू विधायक वेद प्रकाश सोलंकी, पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया, अनिल चोपड़ा आदि तो न केवल धरना स्थल पर पहुंचे, बल्कि समर्थन में धरने पर भी बैठे। सोलंकी ने कहा कि प्री का रिजल्ट जारी होने के बाद सिलेबस में संशोधन किया गया। जिसकी वजह से छात्र मेंस एग्जाम की तैयारी नहीं कर पाए हैं। इसलिए भर्ती परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाना चाहिए। इसी तरह मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा ने भी अपने ट्वीट में परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। लोढ़ा ने कहा कि सिलेबस में बदलाव की वजह से छात्रों को तैयारी का सही वक्त नहीं मिल पाया है। बाजार में तैयारी के लिए किताबें भी उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में भर्ती परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाकर आरएएस मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को राहत देनी चाहिए। वहीं सोमवार को पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल चौपड़ा ने राजस्थान कॉलेज से राजस्थान यूनिवर्सिटी तक छात्रों के साथ रैली निकालकर आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान अनिल चौपड़ा ने सचिन पायलट द्वारा आंदोलन को खुला समर्थन देने की बात भी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि छात्र हित में सचिन पायलट हमेशा से ही आगे रहे हैं। रीट मामले में भी सचिन पायलट ने मुखर होकर आवाज उठाई थी। अब RAS मुख्य परीक्षा स्थगित करवाने की मांग को भी अपना समर्थन दिया है।पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल चोपड़ा RAS अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए
इससे पहले RAS मुख्य परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाने की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत BJP के कई विधायक भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिख चुके हैं। बावजूद इसके अब तक सरकार और RPSC की ओर से छात्रों की मांग को लेकर कोई भी फैसला नहीं किया गया है। जिसको लेकर अब सरकार के खिलाफ छात्रों के साथ उनके परिजन भी सड़कों पर उतर आए हैं।