जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
यूक्रेन में रूसी हमले के बीच देश और राज्य के करीब 16 हजार से अधिक स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं। जिसमे 800 के करीब राजस्थान के हैं। प्रवासी राजस्थानियों और स्टूडेंट्स को सुरक्षित राजस्थान लाने के लिए राजस्थान फाउंडेशन के आयुक्त धीरज श्रीवास्तव की मॉनिटरिंग में विदेश मंत्रालय और यूक्रेन में भारतीय दूतावास के साथ समन्वय बनाया जा रहा है। आयुक्त धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि यह सही है कि यूक्रेन के हालातों के आकलन में कहीं न कहीं भारत सरकार की कमी रही है। जिसकी वजह से समय पर स्टूडेंट्स को वहां से नहीं निकाल पाए। लेकिन फिर भी हम उम्मीद कर रहे हैं कि शनिवार तक भारत सरकार कोई घोषणा करके सभी बच्चों को पड़ोसी देशों की मदद से वापस लाया जाएगा। धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश की गहलोत सरकार ने संवेदनशील निर्णय के साथ पहले ही यह निर्देश जारी कर दिए कि यूक्रेन में फंसे राजस्थानियों को खास कर स्टूडेंट्स के साथ समन्वय बना कर उनको घर तक पहुंचाएंगे। जो अब तक जानकारी मिली है उसके अनुसार 16 हजार के करीब स्टूडेंट कम्युनिटी यूक्रेन में फंसी हुई है। उसमें से करीब 800 बच्चे राजस्थान के हैं। उनको दिल्ली और जयपुर के एयरपोर्ट रिसेप्शन से लेकर घर तक लाने की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी। उनके रुकने खाने- पीने की व्यवस्था सरकार कर रही है। उसके तहत 23 और 24 फरवरी को 34 मेडिकल और इंजीनियरिंग के बच्चे जो वहां से लौटे उनको दिल्ली और जयपुर में रिसीव करके उनके घर तक पहुंच गया है। इसके बाद जो फ्लाइट 24 फरवरी की मॉर्निंग यूक्रेन से रवाना होने वाली थी, उसमे 280 सिर्फ राजस्थान के स्टूडेंट्स थे। लेकिन 24 फरवरी की सुबह से ही यूक्रेन में वॉर शुरू हो गया और फ्लाइट टेकऑफ़ नहीं कर पाई। हम लगातार विदेश मंत्रालय और यूक्रेन में भारतीय दूतावास के साथ समन्वय बनाए हुए हैं कि किस तरह से स्टूडेंट्स को वापस लाया जाए। धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि स्टूडेंट्स को किस तरह से वापस लाया जाए इसको लेकर हर स्तर पर काम चल रहा हैं। हमने भी सलाह दी है कि बच्चों को पहले यूक्रेन से सड़क मार्ग से पड़ौसी देश में लाया जाए उसके बाद भारत सरकार अपनी फ्लाइट के जरिये बच्चों को भारत लेकर आए। श्रीवास्तव ने कहा कि हमने वाट्सएप के जरिये एक लिंक जनरेट किया है। उसे प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, जिलों के अधिकारी और कर्मचारियों के साथ प्रमुख लोगों तक उस लिंक को भेजा है। जिससे हमारे पास यूक्रेन में फंसे बच्चों की सूचना आ सके। उन्होंने बताया कि अब तक 450 बच्चों की सूचना हमारे पास आ चुकी है। हम उनसे लगातार संपर्क में भी हैं। धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों को सड़क मार्ग से लाने में खतरा है। इसलिए भारत सरकार ने उच्च अधिकारीयों की टीम बनाई है वो इस पर काम कर रही है और पड़ोसी देशों से समन्यव भी बना रही है। जब तक भारत सरकार कोई फैसला नहीं करती हमने बच्चों को जहां पर हैं, वहीं सुरक्षित रहने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि हमने यूक्रेन में भारतीय दूतावास से राजस्थानी स्टूडेंट्स की जानकारी मांगी है। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी वो सिर्फ सभी को इंडियन स्टूडेंट्स की सूची जोड़ रहे हैं। जिसकी संख्या करीब 16 हजार है। इसमें से राजस्थान के कितने बच्चे हैं ये तब पता चलेगा जब वो दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि अनुमान के मुताबिक हम यह मान के चल रहे हैं कि करीब 800 राजस्थान के स्टूडेंट्स हो सकते हैं। इसके साथ 2 हजार से ज्यादा वो भी हैं जो प्रवासी राजस्थानी हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि अभी इनकी ऑथेंटिक सूचना हमारे पास नहीं आ पाई है। हम लगातार उनकी जानकारी लेने कोशिश कर रहे हैं। वीजा को लेकर आ रही प्रॉब्लम पर धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि यह सही है कि पड़ोसी देशों से बच्चों को लाने के लिए वीजा का एक इश्यू आया है। इसके लिए भी राजस्थान सरकार ने सुझाव दिया है कि स्टूडेंट्स को सिर्फ इंडियन पासपोर्ट की जांच के साथ ही बॉर्डर से अंदर आने की अनुमति दी जाए। प्रवासी कम्यूनिटी जिसने पहले भी मदद की और इस बार भी पोलैंड और जर्मनी यूरोप में जो हमारे प्रवासी हैं उन्होंने यह निर्णय करवाया की बॉर्डर पर इंडिया पासपोर्ट्स देख आने की अनुमति दे दी जाए। धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि यह सही है कि भारत सरकार यूक्रेन को लेकर चल रहे हालातों के आकलन नहीं कर पाई। यह सीधा सा कॅल्क्युलेशन मिस्टेक रहा है। क्योंकि लौटने की एडवाइजरी भी 21 फरवरी को जारी हुई। उसके बाद उस वक्त ज्यादा समय नहीं बचा था। फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी। साथ ही यह भी प्रॉब्लम रही की यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन क्लास देने से इनकार कर दिया। विद्यार्थियों से कहा गया कि यहां पर कोई दिक्कत नहीं आएगी। आप लोग यहीं रहिए। विद्यार्थी उलझन में थे कि कहीं अटेंडेंस शार्ट न हो जाए। फिर उसके बीच किराए को लेकर चिंता रही। उन्होंने आरोप लगाया कि आकलन में कहीं न कहीं कमी रही है। धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि वह परिस्थितियां अलग थीं, अब परिस्थितियां अलग हैं। जो आज हमारे सामने चैलेंज है वह ये है कि राजस्थान के स्टूडेंट, व्यापारी जो भी वहां पर हैं उन्हें कैसे सुरक्षित वापस लाया जाए और इस पर काम किया जा रहा है।धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि जो विद्यार्थी वहां पर फंसे हुए हैं उन्हें खाना-पानी की दिक्कत आ रही है। उसको लेकर हम इंडियन एम्बेसी के जरिए उनको खाद्य सामग्री पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा जो हमारे राजस्थानी प्रवासी वहां पर हैं। उनके माध्यम से हम उन बच्चों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि उनको खाने-पीने की कमी नहीं हो। अगर एटीएम वर्क नहीं कर रहा है और उनको पैसे की जरूरत है तो वह भी हम उनको किसी न किसी माध्यम से पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे वे परेशान नहीं हों।

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