जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कचरा उठाने की गाड़ियां उपलब्ध कराने वाली कांट्रेक्टर कंपनी के टेंडर को मनमाने ढंग से बिना कोई पूर्व सूचना के अवैध तरीके से निर्धारित समय से पूर्व निरस्त करने के मामले मे सुनवाई करते हुए नगर पालिका किशनगढ़ अजमेर के चेयरमैन, आयुक्त और प्रशासक नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए है।
यह है पूरा मामला।
दरअसल सिरसा हरियाणा की सनराइज कंपनी के निदेशक ने विधि सम्मत तरीके से राज्य सरकार द्वारा जारी निविदा प्रक्रिया में भाग लेते हुए 1 साल के लिए सफाई कर्मियों को कचरा उठाने वाली गाड़ियां एवं ड्राइवर मय जीपीएस सिस्टम के उपलब्ध कराने के टेंडर के माध्यम से प्रार्थी की कंपनी का चयन 1 वर्ष के लिए गाड़ी उपलब्ध कराने के लिए किया गया। विभाग द्वारा जारी वर्क आर्डर की दिनांक से 9 माह तक निर्विवाद रूप से सरकार की मांग के अनुरूप कंपनी गाड़ियां उपलब्ध कराती रही।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहित बलवदा ने न्यायालय को बताया निगम कंट्रोल रूम के निर्देशानुसार निर्धारित क्षेत्रों में जीपीएस सहित गाड़ियों को कचरा उठाने के लिए निर्देशित स्थान पर समय-समय पर भेजा जाता रहा। जिनकी मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग, जीपीएस कंट्रोलिंग सब निगम के अधिकारियो और कर्मचारियों द्वारा कंट्रोल रूम से की जाती थी। उन्हीं के सुपरविजन में गाड़ियों को मौके पर कचरा उठाने के लिए भेजा जाता रहा है। इसी बीच राज्य सरकार के विधि विरुद्ध एवं मनमाने आदेश निकाल कर सनराइज कंपनी के टेंडर को 1 वर्ष से पूर्व ही मात्र 9 माह पश्चात ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। अधिवक्ता बलवदा ने बताया कि प्राधिकृत अधिकारी के आदेश में सरकार की ओर से ब्लैक लिस्टेड करने का कोई युक्तिसंगत कारण भी कंपनी को नहीं बताया गया। राज्य सरकार के इस मनमाने आदेश के खिलाफ प्रार्थी ने हाईकोर्ट में एक सिविल याचिका अधिवक्ता मोहित बलवदा के माध्यम से पेश कर सुप्रीम कोर्ट के गोरखा सिक्योरिटी सर्विस बनाम एनसीटी के आदेश का हवाला देते हुए न्यायालय को बताया कि संविदा का निर्धारित समय पूर्व ही निरस्तीकरण, बिना युक्तिसंगत कारण के और बिना किसी पूर्व सूचना के सरकार द्वारा इस तरह मनमाने आदेश जारी करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करता है। याचिकाकर्ता के तर्क से सहमत होकर एकल पीठ न्यायधीश इंद्रजीत सिंह ने राज्य सरकार के चेयरमैन नगरपालिका किशनगढ़ अजमेर, आयुक्त एवं प्रशासन नगर निगम जयपुर को 6 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए।

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